गुवाहाटी। राज्य सरकार की ओर से कोविड-19 को लेकर पक्षपात का रवैया अपनाने का आरोप जनता द्वारा लगाया जा रहा है। सरकार ने एक आदेश के जारी करके बताया कि कामाख्या देवालय व अन्य धार्मिक स्थलों पर प्रवेश के लिए कोविड टेस्ट में छूट देने के साथ-साथ जनता भवन में आम लोगों के प्रवेश के लिए कोविड-19 को अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि दिसपुर जनता भवन में अधिकारी और कर्मचारियों के लिए कोविड-19 की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है। आम लोगों के टेस्ट जरूरी होने पर नागरिकों ने यह आरोप लगाया है कि क्या अधिकारी और कर्मचारियों को कोविड-19 नही हो सकता। वे भी तो आम आदमियों के बीच से ही आ कर कार्यालय में प्रवेश करते हैं। फिर यह दोगलापन रवैया क्यों? आम लोगों के लिए जनता भवन में प्रवेश के लिए 1 जनवरी से ऑनलाइन के जरिए कोविड-19 प्रमाण पत्र अपलोड किए जाने को लेकर सरकारी काम के लिए बाहर से आने वाले लोगों में आक्रोश व्याप्त है। नव वर्ष के मौके पर कामाख्या मंदिर व अन्य मंदिरों में काफी संख्या में भीड़ होने के बावजूद कोविड-19 टेस्ट मे राहत दी गई है। 1 जनवरी से पहली से लेकर पांचवी कक्षा तक के प्राथमिक विद्यालय में नियमित पढ़ाई शुरू की गई है। किंतु विद्यार्थियों के लिए को भी टेस्ट अनिवार्य नहीं किया गया है ।हालांकि कोविड-19 के चलते आज दूसरे दिन में शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम रही व निजी विद्यालय बंद रहे। विद्यालय प्रबंधकों का कहना है कि अभिभावक कोविंड के डर से बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे हैं।










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