रविन्द्र तोदी
सीमाई गांव के अल्पसंख्यकों को भी जोड़ने में लगी भाजपा
धुबड़ी। शहर से सरहद तक धुबड़ी में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि विधानसभा चुनावों की अब तक घोषणा नहीं हुई है। परंतु पार्टी की हर इकाई बिते कई महीनों से चुनावी मोड में है। कांग्रेस व एआईयूडीएफ जैसे दलों के लिए हरदम गढ़ स्वरुप रही धुबड़ी में चुनाव प्रचार की बात हो या संपर्क अभियान की फिलवक्त तो भाजपा ने इन दोनों पार्टियों को काफी पीछे छोड़ दिया है। जहां कांग्रेस एआईयूडीएफ की हफ्ते भर में मुश्किल से एक सभा या कार्यक्रम हो रहे हैं तो वहीं भाजपा एक ही दिन में पांच से छः तक सभाओं कार्यक्रमों का आयोजन कर उन मतदाताओं को भी जोड़ने में लगी है जो मुल रुप से भगवा दल भाजपा के कट्टर विरोधी रहे हैं।23 नंबर धुबड़ी विधानसभा क्षेत्र की अगर बात करें तो यहां कुल मतदाताओं की संख्या करिब 193000 है। इसमें हिन्दू मतदाताओं की संख्या करिब करिब 60 हजार से अधिक है। जबकि मुस्लीम मतदाताओं की संख्या एक लाख तीस हजार से भी अधिक है। और इसमें भी करिब करिब चालिस हजार के आसपास "भाटिया" मुस्लिम मतदाता हैं। जिन्हें अजमल का कट्टर समर्थक माना जाता है। दरअसल भाजपा धुबड़ी में इसी चक्रव्युह को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। तथा बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक मतदाताओं को भी पार्टी में तरजीह दी जा रही है। इसी कड़ी में भारत बांग्लादेश सीमाई गाछपाड़ा जैसे दुर्गम गांव पंचायत इलाके के तहत सीमाई घिउमारी के सौ से अधिक अल्पसंख्यकों ने भाजपा का दामन थाम लिया।जो कि कांग्रेस एआईयूडीएफ के ट्रैंड मतदाता सदस्य थे। इस अवसर पर सीमाई गांव में आयोजित सभा के दौरान दल के अध्यक्ष डॉ देवमय सान्याल ने कहा कि स्थानिय विधायक व एआईयूडीएफ से इन सबका मोह भंग हो चुका है। तथा धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले कांग्रेस एआईयूडीएफ की मंशा को जनता अब समझ चुकी है।













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