डिब्रूगढ़। डिब्रूगढ़ का असम मेडिकल कॉलेज। सामने उम्मीद भरी भीड़ में पंक्तिबद्ध खड़े लोग। रोगियों और उनके सेवाकर्मी परिवार के लोगों में एक विश्वास कि वो आज भी आएगा। आएगा और निःशुल्क भोजन देगा। और वो अपनी गाड़ी में भोजन लाता है। भूखे लोगों में बांटता है। और चुपचाप चला जाता है। ऐसा पिछले 50 दिनों से लगातार जारी है।
ये हैं युवा समीर शर्मा। चलाते हैं रसोई घर। पर जब देखा कि कोविड के आफत में रोगियों को उचित भोजन नहीं मिल रहा है। वे भूखे सो जातें हैं। किसी को भोजन मिलता है। किसी को समय पर नहीं भी मिलता है। किसी की गरीबी तो किसी की कोविड के बंद में मजबूरी। पर भोजन की समस्या तो है। ये देख वे बस निकल पड़े - उनको भोजन कराने। तब उनके पास न कोई मदद थी। न कोई पूंजी थी और पास सिर्फ था एक विश्वास कि चावल और दाल भी खिला देंगे, तो कोई रोगी या उनको लेकर आया व्यक्ति कोविड के लॉक डाउन में भूखा तो नहीं मरेगा! बस शुरू हो गया एक मानवीय काम।
एक बार जो अन्न सेवा शुरू हुई। तो, न तो लोगों की संख्या कम हुई। और न ही कभी 50 दिनों में कोई भूखा गया।
समीर शर्मा बताते हैं, "बस भगवान श्याम बाबा का नाम लिया। और अन्न सेवा-महान सेवा में लग गया। पहले दर्जन भर लोग आते थे। खबर फैली, तो अब रोजाना 300 से 400 के करीब लोग जुटने लगे। सबको भोजन खिला देता हूँ।"
सवाल था कि कैसे कोई अकेला व्यक्ति, इतने लोगों को, इतने दिनों से, निःशुल्क भोजन दे पा रहा है! सवाल हुआ तो उत्तर भी आया, "सब खाटू वाले श्याम बाबा का आशीर्वाद है। कोई भूखा नहीं गया। न कभी भोजन कम पड़ा। लोग बढ़ते गए। भोजन की व्यवस्था भी बढ़ती गयी। अब लोग चलाकर मदद करने आगे आ रहें हैं कि नेक काम अब नहीं रुकना चाहिए। और इरादा जब तक कोविड लॉक डाउन सामान्य न हो जाय! तब तक अनवरत अन्न सेवा मदद करने की है।"
एक अकेले व्यक्ति समीर द्वारा शुरू अन्न सेवा। सिर्फ हिम्मत के सहारे की बाबा श्याम रास्ता दिखाएंगे। और कभी पूंजी अभाव नहीं हुआ। और न रुका कभी ये 50 दिनों से लगातार जारी सेवा। इरादा हो। काम नेक हो। तो बस आगे बढिए। ईश्वर खुद आगे का रास्ता दिखा देता है। अन्न सेवा - महान इंसानियत सेवा। जो कि डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज में अनवरत जारी है। जारी रहेगा। और जारी रहना भी चाहिए... ये कहानी का अंत नहीं , बस एक शुरुआत है।










कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें