कोविड से मृत लोगो के अंत्येष्टि का कार्य करने वाले अपने प्राप्य से वंचित - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

कोविड से मृत लोगो के अंत्येष्टि का कार्य करने वाले अपने प्राप्य से वंचित

 


अमित नागोरी


जी हाँ सुनने में अटपटा जरूर लगेगा पर गोलघाट में कोविड से मृत लोगो के अंत्येष्टि का कार्य करने वाले लोग अपने प्राप्य से वंचित है। इस सम्बंध में नगरपालिका के एक कर्मचारी ने बताया कि इस मामले पर पहले भी प्रशासन को सूचित किया गया था पर फिर भी इसका कोई फायदा नही हुआ। वही सरकारी निर्देशना के अनुसार सरकार द्वारा इस सम्बंध में कार्यरत लोगो को अविलम्भ 5000 से 10,000 रुपये प्रदान करने का निर्देश भी था। लेकिन गोलाघाट नगरपालिका के अंतर्गत कार्यरित लोग आजतक अपने प्राप्य से वंचित है। 


नगरपालिका के इस सूत्र ने बताया कि इस वर्ष 23 मई को कोविड से मृत्यु हुए व्यक्ति के अंत्येष्टि का कार्य करना शुरू किया था और अब तक 60 लोगो के अंत्येष्टि सत्कार उनके इस कार्य के लिए नियोजित विशेष श्रमिको द्वारा किया गया। बताया जाता है कि अंत्येष्टि में लगने वाले विभिन्न सामग्रियों में लकड़ी से लेकर श्रमिको तक देने हेतु एक बार मे 6000 से 7000 रुपये लग जाते है, वही अन्य खर्च तो है ही। ऐसे में औषतः 8000 रुपये से भी देखा जाए तो अब तक का बकाया होकर 4,80, 000 रुपये हो जाता है जो एक बहुत बड़ी रकम है। 


उक्त सूत्र ने बताया कि अन्यान्य जिलो में 9 से 10 हज़ार रुपये तक का प्रत्येक व्यक्ति पर अंत्येष्टि का प्रावधान है और उन्हें नियमित रूप से मिल भी रहा है। पर गोलाघाट के कर्मी ही क्यों इससे वंचित है, ये समझ से परे है। इसके अलावा इस सम्बंध में प्रशासन द्वारा नगरपालिका को एक तुच्छ राशि प्रदान भी की गई थी, पर चुनाव नही होने के कारण भंग पड़ी नगरपालिका का कार्यभार धीमी गति से चलने के कारण उक्त राशि ज्यो की त्यों पड़ी है। वही एक और अन्य जानकारी के अनुसार नगरपालिका का कार्यभार एक प्रशासन के ही अधिकारी को दिया हुआ था , पर उनके तबादले के बाद एक अन्य अधिकारी ने कार्यभार संभाला है और ये कार्य अब तक अधर में पड़ा है। 


इस सम्बंध में पिछले दो महीनों में प्रशासन के बैठकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, पर इस बारे में लिए निर्णय कार्यान्वित नही हो पाए। अब इस सम्बंध में नगरपालिका के उक्त श्रमिको द्वारा सह संचालक स्वास्थ सेवा के अधिकारी, जिला उपायुक्त और नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी को पूरे मामले में लिखित रूप से शिकायत करने और अपने प्राप्य का जल्द भुगतान किए जाने के संदर्भ में एक आवेदन दिए जाने की बात चल रही है। 


मजेदार बात तो ये है कि वित्त मंत्री के गृह जिले में अपने श्रमदान के प्राप्य हेतु लोगो को जूझना पड़ रहा है। 




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें