ओमप्रकाश तिवारी व राजेश राठी
लखीमपुर। लखीमपुर शहर के मध्य स्थित खेल माटी पुलिस आउटपोस्ट से मात्र 80 से 50 मीटर की दूरी पर चार गाय की मौत हो गई मृतक गाय राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ी हुई थी जबकि सरकार द्वारा दिए गए संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान वाहनों का आवागमन सड़क पर काफी कम है। अगर किसी भारी वाहनों से 4 गायों की एक साथ दुर्घटना होती है तो इसकी आवाज तो 50 मीटर दूर ही स्थित पुलिस चौकी के कर्मचारियों के कानों तक जानी चाहिए परंतु पूछने पर पता चला कि उन्हें इसका अहसास तक नहीं। सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त हुई गायों के सर पर ना तो भारी वाहनों से कुचले जाने का चिन्ह है और ना ही सड़क पर खून के छींटे । आश्चर्यजनक बात यह है कि अगर लखीमपुर में कभी कहीं गाय की मौत होती है उसके अंतिम संस्कार के लिए लखीमपुर नगर पालिका कार्यालय से संबंधित कर्मचारियों की सिफारिश करनी पड़ती है तथा उन्हें समाजसेवी संस्थाओं द्वारा कुछ उपहार स्वरूप दिया जाता है उसके पश्चात वह मृतक पशु के शव को अंतिम संस्कार करने के लिए ले जाते हैं । किंतु आज राजमार्ग पर हुई इस घटना की खबर सोशल मीडिया द्वारा सुबह 5:00 बजे लोगों को मिली और तड़के सुबह 6:00 बजे घटनास्थल पर पहुंचने पर लोग और संवाददाताओं को दुर्घटना स्थल पर गायें नहीं मिलीं । क्योंकि उन्हें अति शीघ्र ही ले जाकर यथास्थल उनका अंतिम कर्म कर दिया गया था लखीमपुर नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा बगैर समीप स्थित पुलिस चौकी को खबर किए। अचानक लखीमपुर नगरपालिका के कर्मचारियों का इस प्रकार सक्रिय होकर इनका अंतिम संस्कार कर देना एक सवाल है । लोगों द्वारा आपत्ति जताए जाने के पश्चात नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा अंतिम संस्कार किए गए गायों को पुनः जमीन के नीचे से निकाल कर उनका पोस्टमार्टम करवाया गया। मृतक गाय के शव का पोस्टमार्टम करने की लखीमपुर में यह पहली घटना है। पांचवी गाय लखीमपुर के बाजार पट्टी के समीप दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।








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