शिलांग। ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) आज दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों के लिए एक आवश्यक मशीन बन चुकी है। बिना किसी परेशानी के पैसे निकालने वाली मशीन एटीएम के अविष्कारक का जन्म मेघालय में हुआ था।
23 जून, 1925 को मेघालय के शिलांग के एक बहुत ही प्राचीन अस्पताल डॉ एच गॉर्डन रॉबर्ट्स अस्पताल में एटीएम आविष्कारक जॉन एड्रियन शेफर्ड बैरन का जन्म हुआ था। ज्ञात हो कि बैरन का निधन 2010 में हो गया था। हाल ही में मेघालय के उक्त अस्पताल में दिग्गज आविष्कारक के सम्मान में एक एटीएम मशीन लगाई गई है। जॉन एड्रियन शेफर्ड बैरन के पिता विल्फ्रेड शेफर्ड बैरन तत्कालीन उत्तर बंगाल बंदरगाह चिटगोंग के मुख्य अभियंता थे।
इसी तरह जॉन एड्रियन की मां डोरथी ओलंपिक टेनिस खिलाड़ी और विंबलडन चैंपियन रहीं। जॉन एड्रियन शेफर्ड बैरन के जन्म के बाद वह भारत के विभिन्न इलाकों की यात्रा कर ब्रिटेन लौट गयीं।
1965 में वह एटीएम आविष्कार के काम को अपने हाथ में लिया था और 1967 में उन्होंने उत्तर लंदन के एक बैंक में दुनिया का पहला एटीएम स्थापित किया। रेग वार्नी नामक लोकप्रिय टेलीविजन स्टार ने सबसे पहले दुनिया के पहले एटीएम से पैसे निकाले। एटीएम की खोज के जरिए दुनिया को फायदा पहुंचाने वाले जॉन एड्रियन शेफर्ड -बैरन का 15 मई, 2010 को स्कॉटलैंड के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
मेघालय के डॉ एच गॉर्डन रॉबर्ट्स हॉस्पिटल में 1925 में एटीएम के आविष्कारक जॉन एड्रियन शेफर्ड बैरन का जन्म हुआ था, वहां अब जाकर पहली एसबीआई की एटीएम लगाई गई है। इस अस्पताल को अगले साल स्थापना के 100 साल पूरे हो जाएंगे।
अस्पताल के मेडिकल सुप्रिंटेंडेंट डॉ रोकेन नॉनग्रूम ने बताया कि एटीएम के लिए एसबीआई को अर्जी दी गई थी, जिसके बाद सात अगस्त को यहां मशीन लगाई गई है। अगले साल हमारे अस्पताल की स्थापना के 100 साल पूरे होने से ठीक एक साल पहले यह मशीन लगाई गई है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में एटीएम होने से अब मरीजों के परिजनों और स्टाफ के लोगों को काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह एटीएम इसलिए खास है क्योंकि इसी अस्पताल में 96 साल पहले मशीन के आविष्कारक का जन्म हुआ था।








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