गुवाहाटी। असम की राजधानी गुवाहाटी में मुख्यमंत्री स्तर की सीमा समस्या पर चर्चा के 24 घंटे बाद ही असम की जमीन पर मेघालय की ओर से डेढ़ किमी आगे आकर सीमा तय करने का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा में सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गर्मागर्म बहस हुई। विपक्षी पार्टी कांग्रेस के विधायक नुरुल हुदा ने सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए तुरंत सीमा मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इसे खारिज कर दिया गया, जिसके चलते विपक्ष के सभी विधायक सदन से बाहर चले गये।
मिजोरम के बाद मेघालय पर शनिवार को असम की राजधानी दिसपुर के कोइनाधारा में सीमा से डेढ़ किमी अंदर आकर सीमा का निर्धारण करने की कोशिश का विपक्ष ने आरोप लगाया है। सदन में विपक्ष ने कहा कि मेघालय के इस कदम से कोइनाधारा के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच दहशत फैल गई है।
उल्लेखनीय है कि दोनों राज्यों के सीमा विवाद के समाधान को लेकर असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के बीच गुवाहाटी के काहिलीपाड़ा में बातचीत हुई थी। विपक्षी विधायक ने कहा कि बातचीत के 24 घंटे के बाद मेघालय की ओर से यह कदम उठाया गया है।
विपक्षी विधायक नुरुल हुदा ने सोमवार को असम विधानसभा के पटल पर शून्यकाल के दौरान सदन के अन्य कार्यों को दरकिनार करते हुए सीमा विवाद पर चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश किया।
हुदा ने जैसे ही स्थगन प्रस्ताव पेश किया तो उसे अध्यक्ष बिश्वजीत दैमारी ने खारिज कर दिया, जिसके बाद सदन में विपक्ष ने सरकार की आलोचना की और सीमा विवाद पर चर्चा की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष बिश्वजीत दैमारी ने सदन के नियमों के अनुसार विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे नाराज विपक्ष के सभी विधायक तुरंत सदन में सीमा विवाद पर चर्चा की मांग करते हुए शोर-शराबा शुरू कर दिया। इस बीच सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने बताया कि मिजोरम ने बराक घाटी के तीन जिलों में असम की जमीन पर अतिक्रमण किया है।
इस बीच विपक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव को रद्द किए जाने से सदन में हंगामा होने लगा। विपक्ष के उपनेता रकीबुल हुसैन ने सीमा विवाद पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने स्थगन प्रस्ताव के समर्थन में सीमा विवाद पर भी चर्चा की मांग की।
विपक्षी की मांग को जब विधानसभा अध्यक्ष दैमारी ने ठुकरा दिया तो नाराज सभी विपक्षी विधायक सदन छोड़ कर बाहर चले गये। सत्तापक्ष के वरिष्ठ विधायक पद्म हजारिका ने सदन में विपक्ष को एकजुट होकर सदन से बाहर जाने के कदम की कड़ी आलोचना की। पद्म हजारिका ने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए सदन से बाहर चले गये हैं। विपक्ष के पास सरकार की बात सुनने का धैर्य क्यों नहीं है? हमारी सरकार असम में एक इंच जमीन भी किसी को नहीं देगी। यह हमारी सरकार का स्पष्ट मत है। विपक्ष बेवजह राजनीतिक मुनाफा लेने की कोशिश कर रहा है।
नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने सदन से बाहर जाने के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। (हि.स.)








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