गुवाहाटी। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य रिपुन बोरा ने केंद्र की मोदी सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि नरेन्द्र मोदी के अब तक के सात वर्ष के शासनकाल में देश के अर्थिक हालात बेहद खराब हो गए हैं।
सांसद बोरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसी देश की स्वस्थ अर्थव्यवस्था का पैमाना उत्पाद की कीमतें, मुद्रास्फीति, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का पूर्ण विकास, लोगों की क्रय शक्ति और प्रति व्यक्ति आय आदि है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी और भाजपा ने 2014 के चुनाव में वादा किया था कि हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार मुहैया कराएंगे, लेकिन इसके विपरीत पिछले सात वर्षों में देश में बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार मौजूदा समय में देश में बेरोजगारी की दर शहरी क्षेत्रों में 9.3 प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में 6.8 प्रतिशत और पूरे देश में 7.6 प्रतिशत बढ़ी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी की विमुद्रीकरण नीति और जीएसटी की वजह से करीब 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं। कोरोना महामारी के चलते प्रधानमंत्री मोदी के अनियोजित दीर्घकालिक लॉकडाउन के कारण विभिन्न क्षेत्रों में करीब 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान भारत में 75 मिलियन लोग अत्यधिक गरीबी से जूझ रहे हैं और लगभग सौ मिलियन मध्यम वर्ग के लोगों की आय पिछली आय की आधी हो गई है।
बोरा ने कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दौरान भी भारत सरकार ने देश में पैदा हुए आर्थिक संकट के दौरान भी भारतीय रिजर्व बैंक के संरक्षित पैसे को नहीं छुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक और प्रशासनिक अक्षमता के चलते रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को बेहद नकारते हुए सहजता से बलपूर्वक 2019 में आरक्षित पूंजी से 1.76 लाख करोड़ रुपये और 2020 के जुलाई माह से 2021 के मार्च तक इन नौ महीनों के अंदर आरबीआई के संरक्षित पूंजी से पुनः 99 हजार 122 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने निकाल लिया। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अशुभ संकेत है।
कांग्रेस सांसद बोरा ने कहा कि देश में क्रय शक्ति और सार्वजनिक आय में भी गिरावट आई है। केंद्र सरकार की गलत नीति की वजह से देश की जीडीपी में भी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने उदाहरण के रूप में बताया कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2020 के मुताबिक भारत दुनिया के 107 देशों में से 94वें स्थान पर है। इस मामले में छोटा देश नेपाल कई मामलों में भारत से पीछे रहने के बावजूद 73वें स्थान पर है, पाकिस्तान 88वें स्थान पर है, बांग्लादेश 75वें, इंडोनेशिया 70वें स्थान पर है।
संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रदेश मीडिया प्रमुख बोबीता शर्मा और अन्य नेता भी मौजूद थे। (हि.स.)








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