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राष्ट्रीय राजमार्ग की उन्नतिकरण हेतु डबका वनांचल के हजारों वृक्ष कटेंगे, हो रहा है लगातार विरोध



निखिल ‌कुमार मुंदड़ा


होजाई। सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन के रूप में वन आरंभ से ही मानव विकास के केंद्र में रहे हैं और इसीलिये वनों के बिना मानवीय जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हालाँकि बीते कुछ वर्षों से जिस प्रकार बिना सोचे समझे वनों की कटाई की जा रही है उसे देखते हुए इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि जल्द ही हमें इसके भयावह परिणाम देखने को मिल रहे हैं। विश्व के साथ-साथ भारत में भी वनों की कटाई का मुद्दा एक महत्त्वपूर्ण विषय बना हुआ है। उल्लेखयोग्य है,‌‌समग्र देश में सबसे ज्यादा वन की कटाई असम में हुई है।


यही बात हाली में अमेरिका की मैरीलैंड विश्वविद्यालय के एक दल ने द्वारा चलाए गए एक अनुसंधान में सामने आई। इस अनुसंधान के अनुसार 2001 सन् से 2020 तक असम में सर्वाधिक 14.1 प्रतिशत वनों की कटाई हुई है। बात अगर हम सन् 2020 वर्ष की करें तो पूरे देश में 1 लाख 43 हजार हेक्टर जमीन वन की कटाई हुई है।



जंगलों की कमी के कारण मौसम में भी इसका सीधा असर देखा जा सकता है। वहीं जिस वक्त पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित है उसी समय होजाई जिले के डबका संरक्षित वनांचल के बीचोबीच से डबका-डिफू सहयोगी राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 36 गुजरता है। जानकारी के अनुसार उक्त राजमार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा चार‌ लेन‌ उक्त राजमार्ग में उन्नति करण करने के लिए तैयार है। परंतु उक्त सड़क के निर्माण हेतु डबका संरक्षित वन से लगभग सात हजार मूल्यवान वृक्षों को काटना पड़ेगा।  जिसमें से कई हेक्टर शाल वृक्ष के हैं। वही जानकारी के अनुसार कटने वाले वृक्षों पर वन विभाग द्वारा नंबरिंग व दाग भी किया जा चुका है। गौरतलब है कि इस सड़क के उन्नति करण हेतु भारी मात्रा में जंगलों  का नुकसान होगा। जोकि जलवायु परिवर्तन के दृष्टिकोण से तो खतरनाक है ही। वही इसके चलते वन्यजीवों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। 



उक्त वनांचल में अन्य वनजीवों के साथ-साथ हाथी और बंदर भी है। उधर असंवैधानिक वैज्ञानिक पद्धति और विकल्प व्यवस्था के दौर में यह बात जगजाहिर हुई कि यह रास्ता चार लाइन युक्त होगा तब लोगों में इसका व्यापक रोष देखा जा रहा है। जिले के डबका के कई संगठनों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जोरदार प्रतिवाद कर रहे हैं। कई संगठन कार्यकर्ता वृक्षों से लिपट लिपट कर विरोध जता रहे हैं वही वृक्षों पर मुझे कटने से बचाओ मुझे बचाओ जैसे बैनर टांग कर विरोध जताया जा रहा है। वही शनिवार को जमुनामुख के विधायक सिराजुद्दीन अजमल ने उक्त स्थल का जायजा लिया। वहीं उन्होंने कहा कि हमें अच्छी सड़क तो चाहिए किंतु वनों की कटाई करके नहीं। अजमल के मुताबिक परिवेश सबसे बड़ी चीज है उन्होंने कहा डबका वन के सुरक्षा हेतु मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे और जरूरत पड़ी तो केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी इस सिलसिले में बात की जाएगी। 


गौरतलब है कि उक्त रास्ते का काम कर्बियांगलॉन्ग जिले से होते हुए आ रहा है। वही‌ कई पर्यावरण विदों का कहना है कि विकास तो जरूरी है किंतु प्रकृति से खिलवाड़ मनुष्य को ही महंगा पड़ता है। आज उन परिणामों के कारण ही हमें देखने को मिलता है मॉनसून का समय पर ना होना, अचानक गर्मी का बढ़ जाना आदि। वही वन्यजीवों को जीने के लिए अति कष्टों का सामना करना पड़ रहा है जिसके कारण हमें मनुष्य एवं वन्यजीवों के बीच संघात की घटना भी आए दिन सामने आती है। पर्यावरणविदों का कहना है कि सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे प्रकृति को भी बचाया जा सके और विकास भी किया जा सके किंतु प्रकृति से खिलवाड़ कर-कर विकास महत्वपूर्ण नहीं।

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