अमित नागोरी
गोलाघाट में भी आज महिलाओ को दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा करते देखा गया । वैसे तो ये पूजा पूरे देश में की जाती है, लेकिन ब्रज में इसका खास महत्व है । कृष्ण नगरी मथुरा में विशेष रूप से गोवर्धन पूजा होती है । इस दिन गाय पूजन का भी बड़ा महत्व माना जाता है । गोवर्धन पूजा की कहानी भगवान कृष्ण से जुड़ी हुई है । पूर्वजो की माने तो इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार का नाश किया था ।
गोवर्धन पूजा को लोग अन्नकूट पूजा भी कहते हैं । दिपावाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है । इस दिन गोवर्धन पर्वत, गोधन यानि गाय और भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व होता है । इसके साथ ही वरुण देव, इंद्र देव और अग्नि देव आदि देवताओं की पूजा भी की जाती है । गोवर्धन पूजा में विभिन्न प्रकार के अन्न का भोग लगाया जाता है सम्भवतः इसलिए इसे अन्नकूट भी कहा जाता है ।
बड़ो की माने तो गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से शुरू हुई । इसमें हिन्दू धर्म के लोग घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते है । उसके बाद गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है । आज मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है ।
गोवर्धन पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभिमान चूर करना चाहते थे । इसके लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर गोकुल वासियों की इंद्र से रक्षा की थी । बताया जाता है कि इसके बाद भगवान कृष्ण ने स्वंय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आदेश दिया दिया था । तभी से गोवर्धन पूजा की प्रथा आज भी कायम है ।








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