'मारवाड़ी सम्मेलन राजस्थानी व्यक्तित्व सम्मान' से नवाजे गए न्यायमूर्ति आदर्श गोयल
कोलकाता। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन पिछले 86 वर्षों से समाज सुधार और सेवा के क्षेत्र में लगातार काम करते हुए समाज की महती सेवा कर रहा है। कोरोना—राहत के लिए भी सम्मेलन ने पूरे देश में कार्य किया है। नाम, पद, धन या किसी संसाधन का महत्व तभी है जब उसका आम जन के कल्याण में सदुपयोग हो। ये विचार राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आदर्श गोयल ने सम्मेलन के 87वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किए। समारोह कोलकाता स्थित कला मंदिर सभागार में आयोजित किया गया। न्यायमूर्ति गोयल ने कहा कि सदियों की गुलामी के दौरान हमारी सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने के अनेक प्रयास किए गए किन्तु 'कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी'। उन्होंने कहा कि सम्मेलन एक संस्था—मात्र नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो समाज के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित भाव से सेवारत है और यही मारवाड़ियों की परम्परा भी है।
सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज में व्याप्त बुराइयों के उन्मूलन एवं मानवीय मूल्यों के संरक्षण में सम्मेलन की महती भूमिका रही है। उन्होंने इस अवसर पर सम्मेलन के संस्थापकों एवं तदुपरांत इसे सींचित, संरक्षित करनेवाले मनीषियों का नमन करते हुए कहा कि ऐसा कोई समाज नहीं है जिसकी कोई समस्या न हो और ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान न हो। आवश्यकता है समाज के सभी तबकों, मातृशक्ति, युवाशक्ति को साथ लेकर कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की। गाड़ोदिया ने कहा कि लोग अपनी गौरवशाली विरासत और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में सांस्कृतिक पुनर्जागरण आज समय की माँग है। हमें रूढ़िवादी परम्पराओं, कुरीतियों का त्याग करना है, समय के अनुसार आगे भी बढ़ना है पर साथ ही अपने सामाजिक मूल्यों, अपने जड़ों से जुड़े रहना भी आवश्यक है। सम्मेलन के सेवाकार्यों और कोरोना—राहत के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज केन्द्र और राज्य सरकारें कई योजनाएँ चला रही हैं और हमें इनका लाभ उठाने में संसाधनहीन समाजबंधुओं की सहायता करनी चाहिए।
समारोह में न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल को विधिक/पर्यावरण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान तथा राष्ट्र एवं समाज की उत्कृष्ट सेवा हेतु अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के सर्वोच्च सम्मान 'मारवाड़ी सम्मेलन राजस्थानी व्यक्तित्व सम्मान' से विभूषित किया गया। प्रह्लाद राय अगरवाला, रतनलाल बंका, शिव कुमार लोहिया, विजय कुमार लोहिया एवं गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया ने पुष्प्गुच्छ, माला, पगड़ी, शॉल एवं मानपत्र देकर उन्हें सम्मानित किया।
समारोह के स्वागताध्यक्ष एवं सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सराफ ने सबका स्वागत किया और सम्मेलन के कार्यकलापों में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। समारोह की सम्मानित अतिथि एवं मारवाड़ी महिला सम्मेलन की राष्ट्रीय अध्यक्षा शारदा लाखोटिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि साथ आना और साथ रहकर समाज की सेवा करना एक गौरवपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि परम्पराओं में समयानुसार परिवर्तन आते रहते हैं किन्तु हमें ध्यान रखना चाहिए कि ये परिवर्तन सकारात्मक हों।
समारोह में 88 वर्ष की आयु में ह्वील चेयर पर पधारे वरिष्ठ सदस्य द्वारिका प्रसाद गनेरीवाल एवं रबड़ बोर्ड के चेयरमैन सावर धनानिया को भी सम्मानित किया गया।
संचालन करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री संजय हरलालका ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि, इतिहास, गतिविधियों एवं उद्देश्यों के उपाख्यानों से समारोह को ज्ञानप्रद और सरस बनाये रखा।
औपचारिक समारोह के बाद शगुन इवेंट्स के बैनर तले, देव गोविन्द बिन्नानी के निर्देशन में, राजस्थानी लोकसंगीत—नृत्य के कार्यक्रम 'हरियालो मारवाड़' की प्रस्तुति हुई। केसरिया बालम आओ जी पधारो म्हारे देस जैसे सुरीले गीतों की ससंगीत प्रस्तुति एवं साथ में मनभावन नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखा और सभागार लगातार तालियों से गूँजता रहा।







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