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क्रिसमस = तुलसी पूजन दिवस

प्रेमलता खंडेलवाल 'हरि-प्रिया'


हर वर्ष 25 दिसंबर को क्रिसमस के रूप में मनाते आ रहे हैं। बच्चों को इस दिवस का व सैंटा क्लोज का वर्ष भर इंतजार रहता है गिफ्ट पाने के लिए। इस दिन को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के रूप में भी हम मनाते हैं। मैं अपने छोटे बेटे के जन्म दिवस के रूप में भी मनाती हूं। सामाजिक संस्था अपने स्थापना दिवस के रूप में भी मनाती है। 

अब कृपया ध्यान दीजिए मेरी व्यथा पर। सनातन धर्म के अनुसार हमें भी अपने धर्म ग्रंथ व उपन्यासों की जानकारी रखना आवश्यक है। क्रिसमस ट्री की भांति तुलसी पूजन के रूप में हम तुलसी के वृक्ष के महत्व को जानकर इस दिवस को तुलसी पूजा के रूप में मनाए तो ज्यादा अच्छा रहेगा। तुलसी वृक्ष की उत्पत्ति की कई धार्मिक मान्यताएं हैं। मैं तो इतना ही कहूंगी कि तुलसी के चढ़े बिना सनातन धर्म में प्रसाद प्रभु ग्रहण नहीं करते। तुलसी ऑक्सीजन प्रदान करती है। इसके स्पर्श से भी लाभ है। तुलसी वृक्ष की परिक्रमा भी फलदाई है। इस वृक्ष के सानिध्य में बैठकर जयमाला जपने पर 1 माला का 100 माला के बराबर प्रभाव होता है। हर रोज तुलसी सींचने से ओज, तेज एवं धर्म की अभिवृद्धि होती है एवं प्रसाद से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। कार्तिक माह में इस वृक्ष के सुबह शाम दीपक जलाने से आत्मिक, शारीरिक एवं धार्मिक उन्नति होती है एवं परिवार में संस्कार एवं संस्कृति का अभिवर्धन होता है। हर वर्ष कृपया सनातन धर्म के पालन करता क्रिसमस डे को तुलसी पूजन दिवस के रूप में मनाने की कृपा करें।

(लेखिका वरिष्ठ सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्ता हैं)

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