ओम प्रकाश तिवारी व राजेश राठी
लखीमपुर। हिंदू युवा छात्र परिषद की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष बोयलेन वैश्य और केंद्रीय साधारण संपादक माधव दास ने हुंकार भरते हुए कहा कि सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) जैसे कानून को असम से किसी भी कीमत पर रद्द नहीं किया जाना चाहिए । इस संदर्भ में हिंदू युवा छात्र परिषद के केंद्रीय साधारण संपादक माधव दास ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि नागालैंड में अर्धसैनिक बलों की गोलियों से अपने प्राण गवा चुके बेगुनाह लोगों की दर्दनाक घटना को केंद्र कर नागालैंड, मणिपुर के साथ-साथ असम से भी इस अफस्पा (सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून) जैसे कानून को षड्यंत्र रच कर रद्द करने की जो मांग की जा रही है उसका हिंदू युवा छात्र परिषद विरोध करती है। जिसकी जानकारी परिषद के केंद्रीय समिति के अध्यक्ष बोयलेन वैश्य, केंद्रीय साधारण संपादक माधव दास ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से संवाददाताओं को दी । उन्होंने कहा कि नागालैंड के मान जिले में अर्धसैनिक बलों की गोलियों से गांव के बेगुनाह लोगों की जो हत्या हुई थी वह बेहद ही दर्दनाक घटना थी। ऐसी घटना को दोबारा ना दोहराया जाए उसके लिए अर्धसैनिक बल के अधिकारियों को भविष्य में और अधिक सतर्कता बरतते हुए कार्य करने की जरूरत है । उक्त घटना की उच्च स्तरीय जांच कर इस घटना में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए साथ ही साथ इस घटना में प्राण गवा चुके प्रत्येक व्यक्तियों के परिवार वालों को उपयुक्त मुआवजा देने का आह्वान परिषद ने किया । इस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार दल संगठन एवं बुद्धिजीवियों द्वारा इस कानून को गलत करार देते हुए इस कानून को रद्द करने की जो मांग की जा रही है वह बिल्कुल ही अर्थहीन है। क्योंकि अगर यह कानून किसी भी प्रकार रद्द हो गया तो राज्य में कई असामाजिक तत्व , माओवादी व आतंकवादी जैसे संगठन अपना सर उठाने लगेंगे जिसके कारण आम लोगों की जीवन यापन में कई प्रकार की असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस परिषद के नेताओं ने प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है असम राज्य की परिसीमा के भीतर शांतिपूर्वक कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों के हाथों में इस प्रकार की क्षमता का होना अति आवश्यक है। ताकि इसके भय से गैर कानूनी कार्य करने वाले लोग सर उठाने की हिम्मत न कर सके। उल्लेखनीय है कि सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) की जरूरत उपद्रव ग्रस्त पूर्वोत्तर के सेना को कार्रवाई में मदद करने के लिए 11 सितंबर 1958 को पारित किया गया था । जिस क्षेत्र को अशांत घोषित किया जाता है वहां पर ही अफस्पा कानून लगाया जाता है और इस कानून के लागू होने के बाद ही वहां सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं।







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