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देश की अर्थव्यवस्था चुनौतियों से लड़ने में सक्षम, आर्थिक सर्वेक्षण की मुख्य बातें



नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के संबोधन के बाद पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश किया। इसके बाद देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डा. वी. अनंत नागेश्वरन और प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने वित्त वर्ष 2021-22 का आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत किया। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में आर्थिक वृद्धि दर 8 से 8.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 9.2 फीसदी रहने की संभावना व्यक्त की गई है। आर्थिक सर्वे में कोरोना टीकाकरण कवरेज और सप्लाई चेन के रिफॉर्म से विकास को सपोर्ट मिलने की बात कही गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण की मुख्य बातें इस प्रकार है :-

-आर्थिक सवेक्षण रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी ग्रोथ सुस्त रहेगी, जो 8-8.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में यह 9.2 फीसदी रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ का आकलन 70-75 अमेरिकी डॉलर कच्चे तेल के के भाव पर आधारित है, जबकि मौजूदा भाव करीब 90 डॉलर प्रति बैरल है।

-आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि 20 साल में पहली बार किसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का निजीकरण हुआ। यह आने वाले समय में बीपीसीएल, शिपिंग कॉरपोरेशन, पवन हंस, आईडीबीआई बैंक, बीईएम और आरआईएनएल की बिक्री के लिए रास्ता और मजबूत करेगा। दरअसल सरकार ने हाल ही में टाटा ग्रुप को एयर इंडिया का स्वामित्व 18 हजार करोड़ रुपये में सौंप दिया। इसमें 15300 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकता किया जाएगा।

-आर्थिक सर्वे के मुताबिक ई-कॉमर्स को छोड़कर आईटी-बीपीओ सेक्टर वित्त वर्ष 2020-21 में सालाना आधार पर 2.26 फीसदी की दर से बढ़कर 19.4 हजार करोड़ डॉलर का हो गया है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर (373.43 लाख करोड़ रुपये) की बनाने के लिए इस अवधि में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1.4 लाख करोड़ डॉलर (104.56 लाख करोड़ रुपये) खर्च करने होंगे।

उल्लेखनीय है कि आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का पूरा लेखा-जोखा होता है। वित्त मंत्री इस दस्तावेज के जरिए यह बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था किस स्थिति में है। सरकार की योजनाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, पूरे वित्त वर्ष के दौरान विकास का क्या ट्रेंड रहा, किस क्षेत्र में कितना निवेश हुआ और योजनाओं को किस तरह अमल में लाया गया। इस रिपोर्ट में सरकार की नीतियों और आने वाले बजट की रूप रेखा की जानकारी भी होती है।

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