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जैविक खेती कर अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे प्रतापगढ़ के रामचन्द्र



-रामचन्द्र दो वर्षों से कर रहे मटर, गेहूं, धान, मेंथी, पालक और चुकंदर की खेती

-गाय के गोबर, गोमूत्र और अन्य सामग्री से खुद ही तैयार करते हैं जैविक खाद

प्रतापगढ़। जिले की लालगंज तहसील क्षेत्र के निवासी रामचन्द्र सरोज तीन वीघा जमीन पर जैविक खेती कर अन्य किसानों को इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह देशी गाय के गोबर एवं गोमूत्र से जैविक खाद तैयार करके दो वर्षों से मटर, गेहूं, धान, मेंथी, पालक, चुकंदर तथा पशुओं का चारा उगा रहे हैं।

सांगीपुर विकास खंड में सई नदी के पास बाबा घुइसरनाथ धाम के नजदीक जगदीशपुर भगौरा गांव निवासी 58 वर्षीय किसान रामचन्द्र लालगंज तहसील में लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं। राजनीति शास्त्र और समाजशास्त्र में स्नातक रामचन्द्र पढ़ाई करने के दौरान नौकरी मिलने के बाद भी जैविक खेती का बीड़ा उठा रखा है। रामचन्द्र का दावा है कि जब भी खाली समय मिलता है तो खेत मे जुट जाते हैं। वह रसायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग करने वाले किसानों से बेहतर जैविक खाद का प्रयोग करके अधिक उत्पादन ले रहे हैं। वर्तमान समय में उनके खेतों में मटर, चुकंदर, पालक, गेंहू और अरहर की शानदार फसल लहलहा रही है।

जैविक खाद बनाने के लिए दस किलो देशी गाय का गोबर, पांच किलो गोमूत्र, एक किलो गुड़, एक किलो चोकर, एक किलो लकड़ी का बुरादा तथा दो किलो खेत की साफ मिट्टी का मिश्रण कर ड्रम में भरकर ठंड में रखते हैं। प्रतिदिन उसे डंडे से चलाते रहते हैं। 15 से 25 दिन में खाद तैयार हो जाती है। इसमें यदि लिक्विड तैयार करना है तो गोमूत्र मिलाना पड़ता है और यदि सूखा खाद बनाना है तो उसे सूखा कर छान लेते हैं। उक्त सामग्री से तैयार खाद डेढ़ से दो बीघा भूमि में प्रयोग होता है।

जीवामृत बनाने के लिए 170 लीटर पानी ड्रम में भरें। इसमें 10 किलो गुड़, 10 किलो बेसन, 10 किलो गाय का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र तथा किसी पेड़ के नीचे की एक मुट्ठी मिट्टी डालें। इसके बाद दस दिन तक रोजाना एक बार ड्रम को हिलाएं। इस तरह से जीवामृत तैयार हो जाएगा। किसानों को जीवामृत बनाने के लिए सिर्फ बेसन और गुड़ खरीदने की जरूरत पड़ेगी। जैविक और प्राकृतिक खेती करने के दो लाभ होते हैं, एक तो फसल में अधिक लागत नहीं आती है और दूसरा उपज से स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

किसान रामचन्द्र कहते हैं कि जैविक खेती करने की उन्हें प्रेरणा रसायनिक खाद एवं कीटनाशक के प्रयोग से भूमि जहरीली होने तथा उसमें पैदा हुए अन्न से मनुष्य के शरीर में तरह-तरह की बीमारियों के जन्म लेने की बात सुनकर मिली। पढ़ाई करने के साथ ही वह किसान गोष्ठियों में प्रतिभाग करते रहे हैं। उनका कहना है कि जब हम जैविक खाद एवं दवाइयों से खेती कर सकते हैं तो कीटनाशक एवं रसायनिक खाद का प्रयोग कर बीमारी को न्यौता देने की जरूरत क्या है।

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