पाकिस्तान के राजनीतिक टिप्पणीकार हसन निसार का विवादास्पद बयान
टीवी शो में निसार ने कहा- 'जबरा' शासन के सिवा कोई और विकल्प नहीं
नई दिल्ली। आर्थिक बदहाली के बीच पाकिस्तान बहुत तेजी से फासीवाद की तरफ बढ़ता दिख रहा है। पाकिस्तानी बुद्धिजीवियों का एक वर्ग, इसकी जमीन तैयार करने में जुट गया है। जिनकी दलील है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, देश की समस्याओं से निबटने में विफल रहा। अगले पांच साल में देश की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है इसलिए देश को अगले 15 साल तक ऐसे शासन की जरूरत है जिसके आगे लोकतंत्र की मांग भी गुनाह होगी।
पाकिस्तान के फायरब्रांड राजनीतिक टिप्पणीकार और वरिष्ठ पत्रकार हसन निसार ने एक टीवी शो में पाकिस्तान में अगले पांच साल तक 'जबरा' शासन की वकालत करते हुए कहा कि 'अगले पांच साल तक देश को प्राइमरी एजुकेशन से लेकर पॉपुलेशन मैनेजमेंट तक स्थिति को संभालने के लिए यह जरूरी है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि जबरा हुक्मरान ही असल हुक्मरान होता है। उन्होंने कहा कि 'यही स्थिति (लोकतांत्रिक व्यवस्था) रही तो अगले पांच साल में देश में आखिरी सीमा तक तबाही पहुंच जाएगी। कोई चीज अपने ठिकाने पर नहीं है।'
हसन निसार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि 'जो कोई भी लोकतंत्र का नाम ले उसे फायरिंग स्क्वायड के सामने खड़ा करना चाहिये और गोलियों और गन का खर्च भी उसके परिवार वालों से वसूल किया जाना चाहिये।' हसन निसार ने पाकिस्तान के भुट्टो और शरीफ राजनीतिक घरानों की भी आलोचना करते हुए कहा कि क्या ये लोग देश संभाल पाएंगे? खुदा का खौफ करें। डिबेट में एंकर ने जब हसन निसार से पूछा कि क्या आप फासीवाद की हिमायत कर रहे हैं ताकि डंडे के जोर पर सब ठीक किया जा सके तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इसके सिवा कोई चारा नहीं है।
उनसे जब यह सवाल किया गया कि इमरान खान को पांच साल और दिया जाना चाहिये या अगले 15 साल तक फौजी शासन तो उन्होंने कहा कि इमरान को भी पांच साल और देकर देख लेना चाहिये और यह हमारा नैतिक कर्तव्य है।
हसन निसार के इस नजरिये की जहां एक ओर स्वीकार्यता है तो एक बड़े हिस्से में लोग आलोचना भी कर रहे हैं।पाकिस्तान के कई दर्शकों ने इस बातचीत का प्रमुख हिस्सा ट्वीट किया है, जिसपर लोग उनकी टिप्पणी की जमकर आलोचना कर रहे हैं।







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