कोलकाता। परंपरा के मुताबिक गणतंत्र दिवस पर देश में पद्म पुरस्कारों की घोषणा होने के बाद उन्हें पाने वालों की चर्चा कम और ठुकराने वालों की चर्चा ज्यादा हो रही है। इसकी वजह है कि बंगाल से दो बड़ी हस्तियों ने सम्मान ठुकराने की घोषणा की है। उनमें से एक तो पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य हैं और दूसरी हैं पश्चिम बंगाल की मशहूर गायिका संध्या मुखर्जी। बुद्धदेव ने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी से वैचारिक भिन्नता की वजह से सम्मान लेने से इनकार किया था लेकिन संध्या मुखर्जी ने ऐसा क्यों किया यह सब के लिए कौतूहल का विषय बन गया था।
अब इनकार के 24 घंटे बाद इस बात का खुलासा हुआ है कि उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार लेने से क्यों इनकार किया। दरअसल संध्या ने बताया है कि वह जितनी अनुभवी हैं उस मुकाबले पद्मश्री पुरस्कार पर्याप्त नहीं है इसीलिए उन्होंने इसे लेने से इनकार किया है।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश की कई नामचीन हस्तियों को प्रतिष्ठित पद्मश्री, पद्मभूषण व पद्म विभूषण अवार्ड देने का घोषणा किया गया। पद्मश्री पाने वालों की सूची में बंगाल की मशहूर गायिका संध्या मुखर्जी का भी नाम शुमार था, लेकिन उन्होंने यह सम्मान लेने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने इसे अपना अपमान बताया है। गायिका के एक पारिवारिक दोस्त ने बताया कि जब केंद्र सरकार के अधिकारियों ने उन्हें मंगलवार दोपहर इस बात की सूचना दी तब उन्होंने अवार्ड लेने से इनकार कर दिया।
90 साल की गायिका संध्या मुखर्जी दक्षिण कोलकाता के लेक गार्डन इलाके में रहती हैं। संध्या मुखर्जी ने बंगाली फिल्मों में हजारों गाने गए हैं और उनकी पहचान आधुनिक और सेमी-क्लासिकल म्यूजिक एलबम को लेकर भी है। प्रसिद्ध गायक हेमंत मुखर्जी के साथ गाए उनके गाने काफी मशहूर रहे हैं। वहीं संध्या मुखर्जी के एक पारिवारिक मित्र ने कहा कि उन्होंने (संध्या मुखर्जी) ने बताया कि दिल्ली से एक अधिकारी ने उन्हें दोपहर के समय फोन किया था। उन्होंने अधिकारी से कहा कि पद्मश्री उनके जैसी अनुभवी शख्सियत को दिया जाने वाला अवार्ड नहीं है। इस अवार्ड को लेना अपमान के बराबर होगा।
साल 1948 में हिंदी फिल्म अंजान घर के लिए गाया था पहला गाना
साल 1931 में जन्मीं संध्या मुखर्जी ने साल 1948 में हिंदी फिल्म अंजान घर के लिए अपना पहला गाना गाया था। इस गाने में संगीत निर्देशन राय चंद बोराल ने किया था। उन्होंने यह गाना एसडी बर्मन, रोशन और मदन मोहन जैसे महान संगीतकारों के दिशा-निर्देश में गाया था। इससे पहले साल 2011 में संध्या मुखर्जी को बंग विभूषण से सम्मानित किया गया था। यह बंगाल सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। साल 1970 में उन्हें बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर के अवार्ड से नवाजा गया था। यह अवार्ड उन्हें फिल्म जय जयंती और निशी पद्मा में गाए गानों के लिए मिला था। निशी पद्मा का हिंदी रीमेक भी बनाया गया था जिसमें राजेश खन्ना नजर आए थे। बांग्ला फिल्मों में उनके सैकड़ों गाने ऐसे हैं जो सदाबहार हैं।







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