गुवाहाटी -- छत्रीबाडी स्थित माहेश्वरी भवन मे माहेश्वरी सभा की योग इकाई महेश योग समितिके सौजन्य से जानकी महल आश्रम श्री धाम वृंदावन के कथा व्यास भरत शरण महाराजजी के मुखारविंद से आज चतुर्थ दिवस मे राम कृष्ण हरि जै जै का संकीर्तन करते हुये भक्त संत माधवदासजी के बारे मे बताते हैं कि उनका जन्म कन्नौज के पास के किसी गाँव मे हुआ था तथा वे गृहस्थ जीवन मे थे तथा पत्नी तथा पुत्र थे। संत माधवदासजी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। कहा जाता है कि वे साझात वेदों के रचयिता श्री वेद व्यास जी के अवतार थे जो श्रीमद भागवत के रचयिता थे तथा इनहोने ही १७ पुराण लिखे थे। संत माधवदासजी के इष्ट भगवान जगन्नाथ थे जहाँ उनहोंने उनकी सेवा मे जीवन अर्पण कर दिया। संत माधवदासजी गृहस्थ थे तथा उनकी पत्नी तथा पुत्र थे। संतजी ने अपना जीवन भगवत भक्ति मे लगाना चाहा परन्तु उनकी पत्नी चाहती थी कि बच्चा बडा हो जाये। परन्तु आकस्मिक बिमारी से पत्नी के निधन हो जाने पर वे पुत्र को भगवान के भरोसे छोड़कर अपना जीवन भगवान जगन्नाथ जी के हवाले कर दिया।







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