दयानंद सिंह
मोरानहाट। सन् 2006 के मार्च महीने की पूर्णिमा के दिन साहित्य चर्चा के अनुष्ठान "जोनाकी मेल "की पहली बैठक हुई थी।बुधवार 16मार्च की शाम बटामारा निवासी दीजेन्द्र नाथ दत्त के घर पर जोनाकी मेल की बैठक हुई।उद्देश्य व्याख्या करते हुए संयोजक बासा बोरा ने बताया कि गत् दिनों काव्य पाठ पर ज्यादा जोड़ दिया गया था।अब उपन्यास और अन्य ग्रंथों पर चर्चा एवं विश्लेषण किया जाएगा ।बैठक का संचालन मोरान महाविद्यालय की सेवानिवृत्त अध्यापिका एवं साहित्यकार ईला बड़गोहाई ने किया।देवेन्द्र नाथ आचार्य के उपन्यास अन्य युग, अन्य पुरुष का विश्लेषण किया डा लोहित बोरा ने।उन्होंने बताया कि असम की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का जो वर्णन किया गया है आज भी उतना ही महत्व है।डo स्वपन सुतिया ने श्री मद्दभागवत गीता पर विश्लेषण किया।उन्होंने कहा कि संसार की हर समस्या और प्रश्न का समाधान श्रीमद्दभागवत गीता में है।क्योंकि स्वयं श्रीकृष्ण ने विशाल रुप का दर्शन करवाया था अर्जुन को और युद्ध क्षेत्र में ही अर्जुन को ज्ञान दिया था।देशी-विदेशी अनेक भाषाओं में गीता का अनुवाद हो चुका है।विदेशी गवेषक श्रीमद्भागवत गीता पर अनुसंधान एवं गवेषणा पर रहे हैं।एक-एक श्लोक का हमारे जीवन में महत्व है।चुटकुला, गीत-संगीत ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।धन्यवाद ज्ञापन और जातीय संगीत के साथ जोनाकी मेल की बैठक संपन्न हुई।







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें