सिलचर से मदन सिंघल
दिनांक 20 मार्च रविवार को तेरापंथ समाज सिलचर ने ममतामयी करुणामयी शासनमाता श्रद्वेया साध्वी प्रमुखा श्री कनक प्रभाजी के महाप्रयाण की स्मृति सभा का जैन भवन में आयोजन किया।जो दिनांक 17 मार्च को प्रातः लगभग 8.45 पर अध्यात्म साधना केन्द्र छतरपुर (दिल्ली) में संथारा सहित अनन्त ज्योति में विलीन हो गई थी।
युगप्रधान महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा घोषित पंच दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान आराधना का आज चतुर्थ दिवस को जप अनुष्ठान के साथ स्मृति सभा भी रखी गई जिसमे अनेक श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने अपनी शासनमाता का गुणगान कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धाजंली समर्पित करने वालों में तेरापंथ सभा अध्यक्ष रतनलाल मरोठी, मंत्री तोलाराम गुलगुलिया, महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती प्रेम सुराणा मंत्री श्रीमती बबीता डागा उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा चोरड़िया प्रचार-प्रसार मंत्री श्रीमती पूजा मरोठी तेरापंथ सभा के परामर्शक मूलचंद बैद वरिष्ठ श्रावक देवचंद बैद तेयुप उपाध्यक्ष अशोक मरोटी थे। स्मृति सभा का शुभारंभ सभा के परामर्शक जेठमल मरोटी के नमस्कार महामंत्र के मंगलाचरण से हुवा।
विभिन्न वक्ताओं ने अपने वक्तव्य में बताया कि संघ महानिदेशिका महाश्रमणी असाधारण साध्वी प्रमुखा कनक प्रभाजी अपने आचार्यो के निर्देशन में साध्वी समाज का पाँच दशकों तक कुशल नेतृत्व कर एक गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किया।आप बहुयामी व्यक्तित्व की धनी थी,प्रभावी व कुशल प्रवक्ता, प्रबुद्ध साहित्यकार, कुशल कवियत्री, कुशल सम्पादिका, व्यक्तित्व निर्मात्री थी।
आपका प्रशासन व प्रबंध कौशल बेजोड़ था। अपनी लग्न, सरलता, ऋजूता, संघनिष्ठा, आचार निष्ठा, व्यापक सोच, वैदुष्य कला से अपने आचार्यों का विश्वास प्राप्त किया। आप एक मात्र ऐसी साध्वी प्रमुखा थी जिन्होंने तीन तीन आचार्यों के शासन की सेवा की। आपकी अमूल्य सेवाएं स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगी तथा संघ को सदियों तक आलोकित करती रहेगी। आचार्यों द्वारा आपको महाश्रमणी, महानिदेशिका, असाधारण साध्वी, शासनमाता आदि अनेक अलंकरणों से अलंकृत किया गया है।







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें