-मारवाड़ियों के विषय में और अधिक जानकारी हांसिल करने की जिज्ञासा देखी गयी है लोगों में-टिकनेत
-मारवाड़ीयों के योगदान पर शोधकार्य आवश्यक- गाड़ोदिया
कोलकाता। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के कोलकाता स्थित सभागार में जयपुर से पधारे जाने-माने विद्वान डॉ. डी. के. टिकनेत के सम्मान में एक सभा आयोजित की गयी। डॉ. टिकनेत का स्वागत करते हुए सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि हालाँकि सम्मेलन के मार्फ़त से कुछ पुस्तकें प्रकाशित की गयी है फिर भी मारवाड़ियों के देशव्यापी इतिहास एवं उनके विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के विषय में साधारण लोगों को बहुत ही अल्प जानकारी है। इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। सम्मेलन इस उदृेश्य की पूर्ति के लिये हर सम्भव सहयोग देने को प्रस्तुत है।
डॉ. टिकनेत ने अपने शोधकार्य के विषय में बताते हुए कहा कि मारवाड़ियों के विषय में उनकी पुस्तकों को अमेरिका के अधिकांश पुस्तकालयों में जगह दी गयी है। मारवाड़ी समाज के विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त करने की जिज्ञासा लोगों में देखी गयी है। उन्होंने बताया कि यह बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन में मारवाड़ीयों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। समाज के लगभग 250 लोगों ने फांसी के फंदे पर चढ़ कर भारत माता को अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। सभा में निर्वतमान अध्यक्ष संतोष सराफ, उपाध्यक्ष भानीराम सुरेका, समाज विकास के संपादक शिव कुमार लोहिया, सूचना तकनीक एवं वेबसाइट उपसमिति के चेयरमैन कैलाशपति तोदी एवं संस्कार संस्कृति चेतना के चेयरमैन प्रहृलादराय गोयनका ने अपने विचार व्यक्त किये। सभा के अन्त में संयुक्त महामंत्री गोपाल अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस सभा में अखिल भातवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारीगण कोषाध्यक्ष दामोदर प्रसाद बिदावतका, वित्तीय उपसमिति के चेयरमैन आत्माराम सोंथलिया, के देवाशीष, बृजमोहन गाड़ोदिया एवं अशोक गुप्ता भी उपस्थित थे।










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