हमारी आस्था का प्रतीक अरुणाचल प्रदेश स्थित परशुराम कुंड तीर्थ एक अत्यंत प्राचीन जागृत तथा रमणीय स्थल है जिसका उल्लेख श्रीमद्भागवत सहित अनेक धर्म ग्रंथों में मिलता है | भगवान श्री परशुराम ने इसी स्थान पर नदी में अपना रक्त रंजित परशु परिष्कृत करके अपने पराक्रम के बलपर परशु से पर्वत श्रृंखला को काटकर उद्गम स्थल लोहित नदी (ब्रह्मपुत्र नद) को भारत की ओर बहने का मार्ग बनाया एवं अरुणाचल पर्वत पर अपनी प्रायश्चित साधना की | लहू धोने के कारण ही इस नदी का नाम लोहित नदी पड़ा और कालांतर में यह स्थान परशुराम कुंड तीर्थस्थल के नाम से विख्यात हुआ |
पर्वतों, घाटियों और वादियों से घिरा यह वनांचल सुसज्जित नयना भिराम प्राकृतिक सौंदर्य की विरासत सहेजें आलौकिक क्षेत्र है | स्वयं विष्णु के अवतार भगवान श्री परशुराम की साधना स्थली परशुराम कुंड में स्नान एवं दर्शन से मनुष्य समस्त पापों से मुक्ति पाकर अक्षय पुण्य को प्राप्त करता है | हर वर्ष मकर सक्रांति के अवसर पर भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों से लाखों तीर्थयात्री भक्तगण इस परशुराम कुण्ड के दर्शन व पवित्र स्नान हेतु आते हैं | विभिन्न सामाजिक संगठन इस अवसर पर अपनी सेवा तीर्थ यात्रियों के लिये उपलब्ध कराते है |
वर्तमान में केंद्र सरकार की तीर्थ यात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान योजना के अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश सरकार के सहयोग से परशुराम कुंड क्षेत्र के व्यापक जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है | गौरव का विषय है कि नारायण कृपा से तीर्थ क्षेत्र परशुराम कुंड के मध्य पवित्र पहाड़ी पर विप्र फाउंडेशन संगठन को भगवान श्री परशुराम की विशाल प्रतिमा स्थापित किए जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है | तीर्थ की महत्ता वह आने वाले दिनों में बढ़ने वाली यात्रियों, पर्यटक की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए विप्र फाउंडेशन द्वारा यहां यात्री निवास, वेद लक्ष्णा, गौशाला, देवालय, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा आदि कार्य भी संपन्न कराए जाने का विचार किया जा रहा है | जहां साक्षात नारायण के अंशावतार स्वयं विराजे हो उस तीर्थ के उन्नयन में सहभागी बनना जीवन को धन्यता प्रदान करना है | व्यक्ति परिवार समाज एवं राष्ट्र की सुख शांति समृद्धि एवं तेजस्विता वृद्धि की दिशा में यह कार्य मानव समाज के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा, प्रभु इसे सभी के सहयोग से पूर्ण करने का सामर्थ्य प्रदान करें |
भगवान परशुराम का जन्मोत्सव समस्त हिन्दू व विप्र समाज अक्षय तृतीया की पावन तिथिपर आनन्द उत्साह व उल्लास के साथ मनाते हैं | यह दिन सनातन हिन्दूओं के लिये प्रमुख दिनों में से एक है जिसमें भगवान परशुराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों के अलावा धार्मिक सभा समारोह, पूजन, हवन, सत्संग, कथा और विशाल शोभा यात्रा का आयोजन किया जाता है | जय श्री परशुराम | जय श्री परशुराम |
प्रस्तुति : विजय कुमार शर्मा
नलबाड़ी, असम












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