गुवाहाटी। असम में विराजमान पूज्या गणिनी आर्यिका शिरोमणि गुरु मां 105 विंध्यश्री माताजी ससंघ के सानिध्य में चल रहे श्री श्री 1008 अभिनव कल्पतरु महामंडल विधान के अंतर्गत श्रावक श्रेष्ठी ने गुरु मां से अपनी जिज्ञासा बतलाते हुए पूछा कि हम भक्ति पूजा दान आदि सब कुछ करते हैं लेकिन हम जो फल चाहते हैं वह हमें नहीं मिलता है इसका कारण क्या है। गुरु मां ने जिज्ञासा का समाधान करते हुए कहा कि आप भक्ति दान पूजा सब करते हैं लेकिन भावों के साथ नहीं करते हैं आप लोग प्रदर्शन के लिए करते हैं आत्म दर्शन के लिए नहीं करते हैं इसलिए आपको मनचाहा फल नहीं मिलता है। जिस प्रकार भूख के अभाव में रखी हुई भोजन की थाली की कोई कीमत नहीं होती। उसी प्रकार भाव के अभाव में भक्ति की कोई कीमत नहीं होती । यदि भाव नहीं है तो कुछ भी नहीं है भावों के साथ की गई आराधना परम आराधना बन जाती है। भावों के अनुसार ही हमें भव की प्राप्ति होती है। कितने ही कार्य करते जाओ कितनी ही क्रिया करते जाओ यदि भाव नहीं है तो वह भक्ति आराधना फल देने वाली नहीं है। कहते हैं भावना भवनाशिनीभावना अच्छी होने से ही भव की प्राप्ति होती है। भक्ति परंपरा से मोक्ष का कारण है। इसलिए अपने भावों को निर्मल रखो दूसरों के कहने पर अपने भावों को मत गिराओ। दूसरे तो निमित्त बन जाएंगे लेकिन भव तो हमारा ही खराब होगा। भावों के साथ भक्ति करने से हमारे भव कम हो जाते हैं ।भाव के साथ की गई भक्ति फलदायक होती है। भले ही भक्ति कम करो लेकिन भक्ति में आकुलता नहीं आना अनाकुलता होनी चाहिए आप भक्ति करके जीवन में खुशहाल रहे। शाम को आयोजित धर्म सभा में आरती होने के बाद गुरु मां ने राजा श्रेणिक की जिज्ञासा का समाधान किया। उसके पश्चात विराग विंध्य कला मंच द्वारा जयपुर राजस्थान से आमंत्रित शांतनु कुमार एंड पार्टी ने त्रिया चरित्र नामक हास्य नाटिका का प्रदर्शन किया। यह प्रेस विज्ञप्ति प्रचार- प्रसार मुख्य संयोजक ओमप्रकाश सेठी एवं किशोर काला द्वारा दी गई।
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प्रदर्शन के लिए नहीं, आत्मदर्शन के लिए भक्ति करनी चाहिए: आर्यिका गुरु मां
प्रदर्शन के लिए नहीं, आत्मदर्शन के लिए भक्ति करनी चाहिए: आर्यिका गुरु मां
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