जब जगदीप धनखड़ की जिंदगी में टूटा दुखों का पहाड़, आज भी याद करके रोने लगते हैं - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

जब जगदीप धनखड़ की जिंदगी में टूटा दुखों का पहाड़, आज भी याद करके रोने लगते हैं

उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ गए हैं। एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने आसानी से जीत दर्ज कर ली। धनखड़ के पक्ष में 528 वोट मिले। वहीं, विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को महज 182 वोट मिले।  कुल 710 वैध वोटों में जीत के लिए 356 वोट की मिलने जरूरी थे। 

राजस्थान के झुंझुनू के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के दूसरे सबसे सर्वोच्च पद तक का सफर तय करने वाले धनखड़ की जिंदगी काफी संघर्षों वाली रही। जिस क्षेत्र में उन्होंने कोशिश की, उसमें उन्हें सफलता मिली। 12वीं के बाद आईआईटी में सिलेक्शन हुआ। एनडीए के लिए भी चयन हो गया। स्नातक के बाद सिविल सर्विसेज परीक्षा भी पास की। लेकिन उन्होंने वकालत का पेशा ही चुना।

14 साल के इकलौते बेटे की मौत ने झकझोर दिया
धनखड़ की शादी 1979 में सुदेश धनखड़ के साथ हुई। दोनों के दो बच्चे हुए। बेटे का नाम दीपक और बेटी का नाम कामना रखा। लेकिन ये खुशी ज्यादा दिन नहीं रही। 1994 में जब दीपक 14 साल का था, तब उसे ब्रेन हेमरेज हो गया। इलाज के लिए दिल्ली भी लाए, लेकिन बेटा बच नहीं पाया। बेटे की मौत ने जगदीप को पूरी तरह से तोड़ दिया। हालांकि, किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला।  

बेटे की मौत का गम आज भी नहीं भुला पाए धनखड़
महज 14 साल के बेटे के खोने का गम आज भी धनखड़ भूल नहीं पाए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो धनखड़ बेटे को याद करके आज भी रोने लगते हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें