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बार काउंसिल की दो दिवसीय हीरक जयंती समारोह का शुभारंभ

गुवाहाटी। बार काउंसिल ऑफ असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की हीरक जयंती समारोह का माछखुवा आईटीए सेंटर में केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजीजू ने दीप प्रज्वलित करके शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनके साथ असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा, बार काउंसिल के चेयरमैन गजानन साहीवाला, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा, गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आर एम छाया, सुप्रीम कोर्ट इंडिया के न्यायाधीश सुधांशु धूलिया, ऋषिकेश राय व सूर्यकांत,बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यकारणी कमेटी के चेयरमैन अपूर्व कुमार शर्मा उपस्थित थे। इससे पहले के सत्र में सुबह बार काउंसिल उत्तर पूर्व के चेयरमैन गजानन सहीवाला ने झंडोत्तोलन किया।


केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजीजू ने अपने संबोधन में गुवाहाटी को उत्तर पूर्व की हृदय स्थली कहते हुए कहां की गुवाहाटी उच्च न्यायालय भारत के सबसे पुराने न्यायालयों में से एक है। हीरक जयंती समारोह के दौरान कानून के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की आवश्यकता विषय पर आयोजित सेमिनार को कानून मंत्री ने आज के समय का सबसे प्रासंगिक विषय बताया। उन्होंने मंत्रालय की ओर से भारत के सभी बार काउंसिल को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। कानून मंत्री ने अपने संबोधन में डिजिटल भारत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके मंत्रालय से संबंधित सभी जानकारी मंत्रालय की वेबसाइट पर लगातार अपडेट की जाती है। जिसके वजह से लोगों तक जानकारी का पहुंचना अब बहुत आसान हो गया है। केंद्र मंत्री ने कहा की गुजरात, कर्नाटक, बिहार सहित अन्य प्रदेशों ने कोर्ट की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग करना शुरू कर दिया है। लाइव स्ट्रीमिंग के अच्छे परिणाम सामने आए हैं वही कुछ परिणाम इसके विपरीत भी हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों के बीच चर्चा होनी चाहिए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने अपने संबोधन में खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह आज इस कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री के अलावा एक अधिवक्ता के तौर पर भी आए हैं।  असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश व सिक्किम की बार काउंसिल के हीरक जयंती समारोह पर उन्होंने पूर्वोत्तर की जनता को बधाई दी। मुख्यमंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्रियों की दिल्ली में हुई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ सभा के दौरान चर्चा की बात सामने रखी। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस ने निचली न्यायपालिका में ज्यादा से ज्यादा पदों को सुनिश्चित करने की बात सामने रखी। उसी सभा में यह बताया गया कि असम कि निचली न्यायपालिका में 300 पदों की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से चर्चा कर के 100 पदों पर तत्काल प्रभाव से भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने की बात पर सहमति बनाई। अपने भविष्य के एजेंडे पर कहते हुए मुख्यमंत्री शर्मा ने अधिवक्ताओं की सामाजिक सुरक्षा पर जोर डाला। उन्होंने कहा कि असम सरकार द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन स्कीम पर भी वह काम कर रहे हैं। द्वितीय सत्र मे रोल ऑफ टेक्नोलॉजी इन लीगल सेक्टर और फैसिलिटेटिंग स्पीडी जस्टिस विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्य कांत ने की। जिसमें प्रवक्ता के रूप में गुवाहाटी हाई कोर्ट के न्यायाधीश सुमन श्याम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के संस्थापक वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ रणबीर सिंह एवं हैदराबाद लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, रायपुर छत्तीसगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर वी सी विवेकानंदन थे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ प्रथम दिन के कार्यक्रम का समापन हुआ।

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