लखीमपुर से राजेश राठी और ओम प्रकाश तिवारी की रिपोर्ट
लखीमपुर। लखीमपुर के त्रिवेणी संगम, जोहिंग में पुण्य मकर माघी पूर्णिमा स्नानोत्सव आगामी पांच फरवरी को बड़े ही धूमधाम से श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। त्रिवेणी संगम उन्नयन समिति के सौजन्य से आयोजित इस माघी पूर्णिमा स्नान उत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति की कामना की जा रही है। प्रातः छह बजे से स्नान का दौर शुरू हो जाएगा। इस अवसर पर धर्म विचार सभा में कई विद्वानों का समागम होगा। इसके अलावा महायज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। मालूम हो कि इस त्रिवेणी संगम का स्कंद पुराण में वर्णित इतिहास और महत्व है। उल्लेखनीय है कि भारत के उत्तर- पूर्व प्रदेश स्थित हरियाली से परिपूर्ण हिमालय पर्वत की गोद में स्थित प्राचीन काल से अविरल धारा से बहती हुई रंगानदी, जोहिंग नदी और ढेकिया नदी की तीन निर्मल धाराएं प्रवाहित होती हुई लखीमपुर शहर से कुछ दूरी पर स्थित जोहिंग धाम के डीजू छापोरी में मिलती है। स्कंद पुराण के कुमारीका खंड में उल्लेख के अनुसार अति प्राचीन काल में इसी त्रिवेणी जलधारा में स्नान करती हुए सिंगल देश के राजा सत्श्रृंग की कन्या देवी कुमारीका को महादेव की कृपा से अपने रूप और योवन की पूर्णप्राति हुई। इसके बाद दूसरे जन्म में कुमारीका सोनी कुमारी उषा की सखी चित्रलेखा के रूप में प्रकट हुई और इसी जगह पर उन्होंने महादेव की आराधना करके सिद्धि प्राप्त की । इसलिए लखीमपुर के धर्मप्राण समाज बंधुओं द्वारा इस जगह को महापवित्र स्थान के रूप में माना गया है तथा इस संगम स्थल को त्रिवेणी संगम, जोहिंग के नाम से नामांकित किया गया है। उत्तर लखीमपुर शहर से लगभग दस किलोमीटर उत्तर जोहिंग धाम के डीजू छापोरी में क्रमश रंगानदी, जोहिंग नदी और ढेकिया नदी के पवित्र संगम स्थल के संरक्षण, सौदर्यीकरण व प्रचार प्रसार के लिए त्रिवेणी संगम चैरिटेबल एंड रिलीजियस ट्रष्ट के नाम से एक दातव्य न्यास का गठन किया गया है। वहीं इस अनुष्ठान के संचलान के लिए त्रिवेणी संगम उन्नयन समिति के नाम से एक सशक्त समिति का गठन किया गया है। त्रिवेणी संगम जोहिंग ने भविष्य में इस संगम स्थल को पर्यटन के क्षेत्र में संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्नयन समिति ने लखीमपुर के लोगों, विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की ओर आकर्षित करने के लिए एक योजना पर काम आरंभ कर दिया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए लखीमपुर की धर्मपरायण जनता की इच्छा के अनुसार लोगों को आकर्षित करने के लिए एक शिव मंदिर, बागीचा, विभिन्न तरह के औषधिगुण संपन्न पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए उद्यान, एक खुले मंच, एक आधुनिक सुविधासंपन्न प्रेक्षागृह के साथ ही योग और अध्यात्मिक ध्यान केंद्र की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा भक्तों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए एक सर्वसुविधा युक्त अतिथिशाला की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों व पुस्तकों के संरक्षण के लिए एक लघु संग्रहाल का निर्माण किए जाने की भी योजना है।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें