गुवाहाटी मालीगांव शिवमंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में फैंसी बाजार स्थित सांगानेरिया धर्मशाला को दूसरे तल्ले पर चल रहे शिवमहापुराण कथा के आज चतुर्थ दिवस की कथा का वर्णन करते हुए पुराण मनीषी संत दिनेशाचार्य जी (काशी) ने कहा कि विवाह एक वैदिक सनातनी परम्परा है जो अनादिकाल से चली आ रही है, जिसका अनुमोदन पालन ब्रह्माजी, विष्णु भगवान एवं भोलेनाथ सदाशिव भी किया करते हैं। सृष्टि एवं विश्व मंगल के लिए सर्व कल्याणार्थ विवाह का विधान है। भगवती पार्वती देवी जो शिव से कभी पृथक नहीं होती वह लीला करती हुयी दिखाई देती हैं विवाह रूपी विधान की साक्षी बनती हैं अत: विवाह एक मसन पवित्र बन्धन है जो वेद सम्मत है। आगे महाराज जी ने बताया कि देवताओं की रक्षा समस्त प्राणियों को बचाने तारकासुर से बचाने के लिए भगवान शिव की समाधि भंग करने कामदेव को चुना गया। सभी के हित करने कामदेव ने भयभीत रहते हुए भी शिवजी का ध्यान भंग कर दिया जिससे प्रभु भोलेनाथ कुपित हुए तीसरा नेत्र खोल दिया जिससे भयंकर अग्नि उत्पन्न हो गई उसी अग्नि में कामदेव भस्म हो गया। बाद में रति के विलाप करने पर कामदेव को अनङ्ग नाम देकर अशरीरी रूप से जीवित कर दिया। तारकासुर वरदान को देखते हुए शिव जी ने विवाह की स्वीकृति दे दी। शिवपुत्र कार्तिकय ही उस असुर का बंध करते हैं। शिव-पार्वती विवाह बड़े धूमधाम से मनाया गया दिव्य सजीव झाँकी पजाई गई हल्दी कुंकुम लगाई गई बहुत दिव्य बरसाए महोत्सव हुआ। बड़े हर्षोल्लास से समस्त भक्त जनों ने नृत्य किया बधाईयाँ लुटाई गई। चतुर्थ दिवस के यजमान संतोष रेणु चौधरी (सपत्नीको ने श्री छाजल अमरी शक्ति समिति, गुवाहारी की तरफ से व्यास पूजन एवं पीठ पूजन किया गया।







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