गुवाहाटी। मारवाड़ी सम्मेलन की कामरूप शाखा का दो दिवसीय राजस्थानी गीत संगीत कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में असम राज्य जीएसटी के प्रिंसिपल कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित करके किया।इस अवसर पर उनके साथ इनकम टैक्स के इन्वेस्टिंग डिप्टी कमिश्नर मयूर मोर एवं तेरापंथ सभा गुवाहाटी के पूर्व अध्यक्ष बसंत सुराणा उपस्थित थे। शाखा अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने स्वागत भाषण देकर सभी का स्वागत किया। गीत संगीत कार्यशाला कार्यक्रम संयोजक संदीप चमडिया ने कार्यक्रम की व्याख्या करते हुए बताया की 13 और 14 अक्टूबर को माछखुवा स्थित आईटीए सेंटर में दो दिवसीय राजस्थानी लोकगीतों के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ाने एवं लोकगीत गायन का विधिवत प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जिसमें राजस्थानी लोकगीत धरती धोरा री, मोरिया आचो लाग्यो रे ,लडली रूमा झूमा रे, छोटी सी उमर परणाई रे बाबोसा, कुएं पर एकली, मिश्री का बाग लगा दे इन छह लोकगीतों पर संगीत कार्यशाला का प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राकेश अग्रवाल ने कहा की संस्कृति एक जीवन की शैली है। हमारे जीवन में आहार विचार, सोच रहन सहन , संगीत, पहनना ओढना सभी संस्कृती में ही समाहित रहते हैं। राजस्थानी संस्कृति को बचाने के लिए राजस्थानी भाषा को भी बचना होगा। आज राजस्थान में तीन भाषा विलुप्ती के कगार पर है। फिर भी राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पा रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार की तरफ से काफी प्रयास किए हैं। लेकिन यह प्रयास सिर्फ राजस्थान में ही नहीं होना है। बल्कि यहां के प्रवासी राजस्थानियों को भी प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में असम मध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रमेश चंद्र जैन भी विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम संयोजक संदीप चमडिया ने तीन राजस्थानी गीत की कार्यशाला लेते हुए इन गीतों को बारीकी से प्रतिभागियों को समझाया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शाखा के संस्थापक अध्यक्ष संपत मिश्र, उमाशंकर गट्टानी, पूर्व अध्यक्ष निरंजन सिकरीया, अजीत शर्मा, खुशबू वर्मा, सुनीता गुप्ता, बबीता खेतान, सरला जैन बबीता अग्रवाल इंदिरा देवी गट्टानी, मारवाड़ी महिला एकता मंच की अध्यक्ष सरोज मित्तल व अन्य कई सदस्यों ने अपना सहयोग दिया। आज प्रथम दिन 52 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में अंश ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नखराली बाईसा फाउंडेशन का सक्रिय सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन कंचन शर्मा ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन सचिव संजय खेतान ने दिया।







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