उदगांव से कनक भंसाली
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के उदगांव मे कुंजवन महोत्सव का धूमधाम से शुभारंभ हुआ। महोत्सव में दिव्य मंत्रों के साथ उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि आचार्यश्री 108 गुरूवर्य प्रसन्न सागर जी महाराज के सान्निध्य में सभी कार्यक्रमों का शानदार आगाज हुआ। गाजे बाजे के साथ निकाले गये जुलुस ने नगर भ्रमण कर महोत्सव की धमक से पूरे उदगांव को झंकृत कर दिया। घर-घर में महोत्सव की धूम रही। यह महोत्सव उदगांव की इस पावन धरा पर नया इतिहास बना रहा है। जिसके साक्षी यहां मौजूद हजारों भक्तों के साथ इस धरती का कण-कण बन रहा है।
श्री ब्रहम्नाथ पुरातन दिगंबर जैन मंदिर टस्ट कुंजवन - उदगांव में आदि-सन्मति तीर्थ धाम में कुंजवन महोत्सव मनाया जा रहा है। आज भगवान मेला, आनंद महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें सुबह 7 बजे आचार्य श्री को निमंत्रण, गुरूवर्य की आज्ञा उपलब्ध होने पर मंदिरजी से श्रीजी की मूर्ति को रथ में विराजमान करने के साथ ही जुलूस के रूप में भ्रमण कराया गया। गाजे बाजे के साथ निकाले गये जुलुस में उत्साह उमंग से लबरेज भक्तों का सेलाब उमड़ता रहा। जुलुस में 108 सौभाग्यवती महिलाएं एवं 56 कुमारीकायें की मंगलकुंभ घटयात्रा अपने पवित्र पावन परिधानों के साथ अनोखी आभा से जनमानस को पावनता के अहसास से सराबोर करती रही। जुलुस के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पूर्व मंत्रोच्चारण के साथ ही धार्मिक क्रियाओं के द्वारा मंडप का उद्घाटन व वेदी शुद्धि कर मंडप में भगवान को विराजमान किया गया। यहां अलोकिक दिव्यमंत्रों के साथ गुरूवर्य के सान्निध्य में श्रीजी का अभिषेक किया गया। अभिषेक के दौरान जनसमुदाय करतल ध्वनि के साथ अपने हर्ष को व्यक्त करता रहा। कहते हैं कि प्रभु का अभिषेक करने वाले और देखने वाले भक्तों की कर्म निर्जरा स्वतः ही होना शुरू हो जाती है, अभिषेक की भव्यता भक्तों के भावों में होती है। जैसे भाव, वैसा ही प्रताप उनके जीवन में उदय होता है। प्रभु अभिषेक के साथ ही शांतिधारा और पूजा होती रही।
साढ़े नौ बजे श्रेष्ठीजनों द्वारा आचार्य श्री के सान्निध्य में पवित्रमंत्रों के उच्चारण के साथ घ्वजारोहण किया गया। इस मौके पर उत्कृष्ट सिंहनिष्क्रडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि आचार्यश्री 108 गुरूवर्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपने मंगल उदबोधन में, भक्तों को भक्ति का अर्थ और इस मौके पर आयोजित कार्यक्रमों के प्रति भावों की निर्मलता के लाभ बताने के साथ ही मानव जीवन की अलोकिकता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जीवन की आपाधापी के बीच मानव मन विभिन्न प्रकार के विकारों से ग्रस्त हो जाता है। उसकी प्रतिदिन शुद्धि भी आवश्यक है। मानव मन की शुद्धि का एक ही मार्ग है वह है धरम की शरण, जब हम धर्म की शरण लेते है। तब ही हमारे विचार और भावों में परिवर्तन होते हैं। यही परिवर्तन जीवन की उत्कृष्टता की ओर हमारा पथ प्रशस्त करते है।
दोपहर दो बजे के लगभग आचार्य श्री सन्मति सागर जी की मूर्ति का आकार शुद्धि एवं लोकार्पण किया गया। इस मौके पर आचार्य श्री सन्मति सागर जी के स्मरणों का उल्लेख करते हुये उनकी कठिन तपश्चर्या एवं अतिशय के बारे में बताया गया। ऐसे आचार्य धरा पर विरले ही हुये हैं, जिनसे आज भी जन-जन उपकृत हो रहा है। संध्याकाल में उत्कृष्ट सिंहनिष्क्रडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि आचार्यश्री 108 गुरूवर प्रसन्न सागरजी महाराज के प्रवचन एवं आनंद यात्रा गुरूवर्य की आरती का आयोजन धूमधाम के साथ हुआ। इसके बाद संस्कृतिक कार्यकर्मों की धूम रही। इसमें भक्तों ने तरह-तरह के अभिनय एवं भजनों पर नृत्य कर मौजूद लोगों का मन मोह लिया।
23 दिसंबर को मंत्र स्नान महोत्सव के कार्यक्रम सुबह सात बजे से रात्रि साढे सात बजे तक चलेंगे। 24 दिसंबर को तपस्वी सम्राट समाधि महोत्सव 25 को जन मंगल मत्रानुष्ठान महोत्सव, 26 दिसंबर को योगमंडल विधान, गुरुकृपा व्रत संस्कार महोत्सव, 27 दिसंबर को मंदिर शुद्धि गर्भकल्याणक महोत्सव, 28 दिसंबर को जन्मकल्याणक, 29 दिसंबर दीक्षा कल्याणक के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। यह सभी कार्यकम उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि आचार्यश्री 108 गुरूवर्य प्रसन्न सागर जी महाराज के सान्निध्य में होंगें। कार्यक्रम आयोजक श्री ब्रहम्नाथ पुरातन दिगंबर जैन मंदिर टस्ट कुंजवन उदगांव रहेगा।







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