गुवाहाटी। गौ परशुराम महाकथा मे व्यास पीठ से आचार्य नंदूजी जाजड़ा ने भगवान परशुराम के जन्म की कथा सुनाई। साथ ही उन्होंने इस मौके पर गौ माता की उत्पति की कथा भी बतायी। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम और विश्वामित्र के चरु बदले जाने के चलते उन्होंने क्षात्र गुण के साथ विप्रकुल में जन्म लिया, जबकि विश्वामित्र को राजा होते हुए भी ब्राह्मण गुण प्राप्त हुए। इससे पहले प्रथम दिन सुबह सात बजे एटी रोड श्याम मंदिर से आठगांव होते हुए निशान यात्रा परशुराम सेवा सदन पहुंची। बाद में अपराह्न तीन बजे से कथा का शुभारंभ हुआ। सबसे पहले आज के यजमान कमला-श्याम सुंदर लाटा ने व्यास पीठ एवं परशुराम पूजन किया। कार्यक्रम के दौरान गायक कलाकार विनोद शर्मा ने सुमधुर भजनों से शमा बांधा। कथा की दूसरे दिन व्यास पीठ से भगवान राम के जन्म की कथा सुनाई गई कथा के अंत में समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों का व्यास पीठ से दुपट्टा पहन कर सम्मानित भी किया गया। कथा के दूसरे दिन आचार्य नंदूजी जाजड़ा ने कहा गौकथा सुने बिना गौ दर्शन का अधिकार नहीं मिलता। जाजड़ा जी ने कहा गौ माता सर्वदेवमयी है। भगवान शंकर के वाहन गौमाता के पुत्र नंदी हैं। भगवान राम का आगमन गौमाता के लिए हुआ। यहां तक कि रघुकुल का वंश विस्तार गौकृपा से हुआ। ऐसे ही कृष्ण ने तो ग्वाला बन कर गौ चराकर गौ महत्ता का अनुपम उदाहरण ही प्रस्तुत किया। महाराज श्री ने कहा कि भगवान परशुराम का विराट व्यक्तित्व भी गौ संरक्षण का संदेश देता है। सहस्त्रार्जुन का वध गौभक्ति का अद्भुत उदाहरण है। महाराज ने कहा कि परशुराम द्वारा मातृ वध को लेकर विवाद खड़ा किया जाता है, जबकि वो एक अध्यात्मिक संदेश है। मातृ हत्या वास्तव में ममकार रूपी दोषों पर विजय है। ऐसे ही क्षत्रिय वध रजोगुण पर विजय का द्योतक है। महाराज ने कहा कि कथाओं से जरिए संतों ने अध्यात्मिक संदेश दिए हैं।
कार्यक्रम में अध्यक्ष संतोष शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप पारीक, कोषाध्यक्ष नेमीचंद शर्मा, पुखराज राजपुरोहित, शिवकुमार पारीक, राजकुमार शर्मा, मंजूलता शर्मा, जितेंद्र शर्मा, रितेश शर्मा, रमेश शर्मा, अनूप शर्मा, प्रभात शर्मा, नारायण सारस्वत, रामस्वरूप शर्मा, गौरव शर्मा, महेंद्र शर्मा, सुरेंद्र शर्मा आदि कार्यकर्ताओं ने प्रमुख भूमिका निभाई।







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