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शपथ ग्रहण समारोह के साथ प्रारंभ हुआ लखीमपुर चिकित्सा महाविद्यालय में नए सत्र का पाठ्यक्रम

 


आज लखीमपुर मा चिकित्सा महाविद्यालय में सत्र 2025 26 के विद्यार्थियों की शिक्षा का पहला दिन प्रारंभ हुआ इस दिन इस अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ प्रांजल तहबिलदार, महाविद्यालय के अन्य प्राचार्य गणों के साथ इस वर्ष नामांकन प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक व माता-पिता उपस्थित रहे।आज के इस शपथ ग्रहण समारोह में नव नामांकित विद्यार्थियों को शपथ दिलाई गई। यह शपथ एक शाश्वत प्रतिज्ञा है जिसमें मानवता की सेवा में देखभाल, करुणा और निष्ठा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का एक गंभीर वादा होता है ।सदियों पुरानी परंपराओं और नैतिक सिद्धांतों में निहित, यह शपथ चिकित्सकों के लिए चिकित्सा की जटिलताओं से निपटने में एक मार्गदर्शक प्रकाश का काम करती है।

 आज विद्यार्थियों ने शपथ लिया कि

1. वे मानवता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगे।

2.उनके मरीज का स्वास्थ्य और कल्याण उनका पहला विचार होगा ।


3.सदैव अपने मरीज की स्वायत्तता और गरिमा का सम्मान करेंगे।

 

4. मानव जीवन के प्रति सर्वोच्च सम्मान बनाए रखेंगे।


 4.उम्र, बीमारी या विकलांगता, पंथ, जातीय मूल, लिंग, राष्ट्रीयता, राजनीतिक संबद्धता, जाति, यौन अभिविन्यास, सामाजिक स्थिति या किसी अन्य कारक को अपने कर्तव्य और मेरे रोगी के बीच हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देंगे।

 

 5.उन सभी रहस्यों का सम्मान करेंगे जो उन्हें बताए गए हैं, यहां तक कि रोगी की मृत्यु के बाद भी ।


6.अपने पेशे का अभ्यास विवेक और गरिमा के साथ तथा अच्छी चिकित्सा पद्धति के अनुसार करेंगे।


 7.सदैव चिकित्सा पेशे के सम्मान और महान परंपराओं को बढ़ावा देंगे।


  8.अपने शिक्षकों, सहकर्मियों और विद्यार्थियों को वह सम्मान और कृतज्ञता देंगे जो उनका हक है।

 

9.रोगी के लाभ और स्वास्थ्य देखभाल की उन्नति के लिए वे अपना चिकित्सा ज्ञान साझा करेंगे।

 

10.उच्चतम मानक की देखभाल प्रदान करने के लिए अपने स्वास्थ्य, कल्याण और क्षमताओं का ध्यान रखेंगे।

 

11.कभी भी अपने चिकित्सा ज्ञान का उपयोग मानव अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं का उल्लंघन करने के लिए नहीं करेंगे, यहां तक कि धमकी के तहत भी।


12.महिलाओं का इलाज उनके परिवार के पुरुष सदस्यों या अन्य परिजनों की उपस्थिति में ही करेंगे।

 

भारत में 'चरक शपथ' चिकित्सा के छात्रों को दी जाने वाली एक शपथ है, जो प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथ 'चरक संहिता' पर आधारित है। इसे हिप्पोक्रेटिक शपथ (Hippocratic oath) के स्थान पर लाने का राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का प्रस्ताव रहा है।


इस शपथ में चिकित्सा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने, आजीवन सीखने, रोगियों की देखभाल में करुणा और समर्पण दिखाने, और जनकल्याण के लिए ज्ञान का उपयोग करने का वचन दिया जाता है. 


यह भावी चिकित्सा छात्रों के लिए शिक्षक द्वारा दिए गए निर्देशों का एक समूह है। जिसके तहत इन चिकित्सा विद्यालय के छात्रों को भविष्य में चिकित्सक के रूप में व्यवसाय को सत्य, प्रामाणिकता और विवेक से करने का संकल्प, रोगी के प्रति मानवीय, आत्मीय और करुणामय व्यवहार ,रोगी की गोपनीयता बनाए रखना, अपने सफलता और ज्ञान का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए करने का वचन लिया जाता है।

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