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गुवाहाटी में ज़ुबीन गर्ग को विदाई देने सड़कों पर जुटे हज़ारों प्रशंसक

 


असम के लोकप्रिय गायक और सांस्कृतिक प्रतीक, ज़ुबीन गर्ग का पार्थिव शरीर आज सुबह दिल्ली से एक चार्टर्ड विमान द्वारा गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई ( एलजीबीआई ) हवाई अड्डे पर पहुँचा।


दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा व पवित्र मार्घरिटा द्वारा भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद, पार्थिव शरीर को सावधानीपूर्वक एक ताबूत में रखकर असम ले जाया गया। हिमंत विश्व शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने राज्य के सांस्कृतिक परिदृश्य में गायक के अपार योगदान को सम्मानित किया। गुवाहाटी में, हज़ारों प्रशंसक ने जुलूस के रुप मे सड़कों पर, हवाई अड्डे पर और काहिलीपाड़ा स्थित ज़ुबीन के घर के पास जमा हो गए थे, और अपने प्रिय ज़ुबीन दा की अंतिम यात्रा का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। प्रशंसकों की भारी भीड़ के कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया, क्योंकि प्रशंसक दिवंगत संगीत दिग्गज की एक झलक पाने के लिए आगे बढ़ रहे थे। सरुसजाई स्टेडियम में, सुबह-सुबह ही प्रशंसकों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ दिया, और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बेताब थे। पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद, कई लोग बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े।एलजीबीआई हवाई अड्डे पर स्थिति और बिगड़ गई, जहाँ भारी भीड़ के कारण पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।अधिकारियों ने प्रशंसकों से गायक के अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान शांत रहने और सहयोग करने की अपील की। शोक और प्रेम का यह विशाल प्रवाह असम और उसके लोगों पर ज़ुबीन गर्ग के गहरे प्रभाव को दर्शाता है। दशकों तक फैले उनके संगीत ने पीढ़ियों को पार कर लिया है, और आज, पूरा राज्य अपने सबसे प्रिय सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक को सम्मानजनक विदाई देने के लिए एकजुट है।


ज़ुबीन गर्ग, जिन्हें “ज़ुबीन दा” के नाम से असम ही नहीं, पूरे पूर्वोत्तर भारत में गहरी श्रद्धा और प्रेम के साथ जाना जाता था, उनका यूँ असमय जाना संगीत, संस्कृति और जनभावनाओं के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

गुवाहाटी हवाई अड्डे पर और फिर उनके निवास स्थान व सरुसजाई स्टेडियम में उमड़ी भारी भीड़ यह स्पष्ट करती है कि ज़ुबीन गर्ग केवल एक गायक नहीं थे — वे असम के आत्मा की आवाज़ थे। उनकी आवाज़, उनके गीत, और उनका व्यक्तित्व असमिया पहचान का हिस्सा बन चुके थे।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पवित्र मार्घरिटा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति, और उनकी भावभीनी श्रद्धांजलि यह भी दर्शाती है कि ज़ुबीन दा का योगदान केवल संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि वे राज्य की सांस्कृतिक चेतना में गहराई तक बसे हुए थे।भीड़ की बेकाबू स्थिति भले ही प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गई हो, लेकिन यह उस प्यार और सम्मान की तीव्रता को भी दर्शाती है जो लोगों के दिलों में ज़ुबीन गर्ग के लिए था।उनकी अंतिम यात्रा, एक महान कलाकार को जन-जन से मिल रहे अंतिम प्रणाम का प्रतीक बन गई है।

यह क्षण सांस्कृतिक शोक का है।

एक युग की समाप्ति का है।

और साथ ही एक विरासत के अमर होने का भी है। ज़ुबीन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को मेघालय के तुरा में हुआ था। संगीत का संस्कार उन्हें बचपन से ही मिला। छोटी उम्र से ही वे तबला, गिटार, कीबोर्ड और हार्मोनियम जैसे कई वाद्य यंत्रों में दक्ष हो गए थे।बचपन में ही जुबीन ने संगीत को अपना जीवन बना लिया और उन्होंने असमी लोकसंगीत, भक्ति गीतों और आधुनिक गीतों में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जोरहाट और गुवाहाटी में पूरी की। इसके बाद संगीत की गहरी समझ हासिल करने के लिए उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से संगीत में औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। ज़ुबीन गर्ग ने 1990 के दशक की शुरुआत में अपने संगीत करियर की नींव रखी। उनका पहला एल्बम था अनामिका  (1992), जो असमी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट असमीया एल्बम निकाले, जैसे माया,मुकुल,जुबीनोर गान,पाकीजा,चांदनी रात, उन्होंने भूपेन हजारिका की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए असमिया भाषा को देश और दुनिया में एक पहचान दिलाई। 

ज़ुबीन गर्ग ने हिंदी फिल्म उद्योग में कदम 2005 में फिल्म "गैंगस्टर" के मशहूर गीत "या अली" से रखा। यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि यह उस दशक के सबसे बड़े हिट्स में शामिल हो गया। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों के लिए गाया।या अली (2006), सुधु तुम इले ना (बंगाली),दिल तू ही बता कृश--3,सुबह सुबहऔर अन्य कई गीत।हालांकि ज़ुबीन ने बॉलीवुड में सीमित काम किया, पर उनकी पहचान हमेशा एक स्वतंत्र, विविधभाषी और लोक-संस्कृति से जुड़े कलाकार की रही।ज़ुबीन ने सिर्फ असमिया और हिंदी ही नहीं, बल्कि बांग्ला, नेपाली, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु और पंजाबी जैसी भाषाओं में भी गाया। उन्होंने लगभग 16 भाषाओं में 16,000 से अधिक गाने गाए — यह आंकड़ा उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण है। ज़ुबीन एक गीतकार, संगीतकार, अभिनेता और निर्माता भी थे।उन्होंने असमिया फिल्मों में अभिनय किया और कई सामाजिक मुद्दों को उजागर किया। उन्होंने नशा विरोधी अभियानों और शिक्षा संबंधी आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कई स्वतंत्र संगीतकारों और उभरते कलाकारों को मंच प्रदान किया।

उन्होंने कई पुरस्कार भी प्राप्त किया जिसकी श्रृंखला में असम रत्न पुरस्कार,नेशनल फिल्म अवॉर्ड (बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर – 2007), जी सिने अवॉर्ड,संगीत नाटक अकादमी सम्मान (असम) के अलावा अन्य कई पुरस्कार शामिल है। ज़ुबीन गर्ग ने गरिमा सैकिया से विवाह किया था। वह भी संगीत से जुड़ी हुई हैं और ज़ुबीन के करियर में एक मजबूत स्तंभ बनी रहीं।ज़ुबीन गर्ग का निधन 2025 में हुआ, जिसने पूरे असम और देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी। उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि वे केवल एक गायक नहीं, एक जन-भावना थे। उनका संगीत, उनकी आवाज़ और उनकी पहचान सदियों तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। ज़ुबीन गर्ग सिर्फ एक कलाकार नहीं थे — वे एक आंदोलन थे।

एक ऐसी आवाज़, जिसने असम को गाया, जगाया और एक कर दिया।उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत अमर है।

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