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जुबिन गर्ग: असम की अस्मिता और संगीत साधना के अप्रतिम व्यक्तित्व


अजय तिवारी


जब यह दुखद और पीड़ादायक, दिल को झकझोर देने वाली ख़बर जन जन तक पहुंची सहसा विश्वाश नहीं हुआ। संगीत की दुनिया के दिलों की धड़कन, युवा दिलों से लेकर हर दिलों पर समान रूप से राज करने वाले जुबिन गर्ग का कल सिंगापुर में महाप्रयाण हो गया।

अपनी सुरीली आवाज़ से संगीत जगत को मंत्रमुग्ध करने वाले, जन के गायक और सबसे बड़ी बात यह कि असम की सांस्कृतिक अस्मिता के गौरव काल का जिसे कभी लखी नाथ बेजबरुआ, रूपकुंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाला और भूपेन हजारिका जैसे महान व्यक्तित्वों ने प्रतिनिधित्व किया हो,उस परम्परा को समृद्ध किया, एवं संगीत साधक के बहुत बड़े हस्ताक्षर के रूप में विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाई। आसान नहीं होता है जुबिन गर्ग होना। लगभग 40 भाषाओं में गायन, गीत गाकर श्रोताओं का चहेता बन जाना। जुबिन की सबसे बड़ी खासियत रही है कि उन्होंने अपने को अपने दर्शकों चाहने वालों के साथ अपने को बनाए रखा।

एक सामान्य की तरह जीना और बिना किसी आत्ममुग्धता के जीवन जीना। उनके निधन से संगीत जगत की अपूर्णनीय क्षति हुई जिसकी भरपाई संभव नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले असम के सांस्कृतिक गौरव पुरूष भूपेन हजारिका के शताब्दी वर्ष की शुरुआत हीं हुई थी कि अचानक,असमय जुबिन गर्ग का निर्वाण स्तब्ध कर गया।

"हो न सका किसी को जुबिन के कद का अंदाज़ा वह आसमां था, मगर झुक कर चलता था!"

विलक्षण प्रतिभा के धनी और संगीत सम्राट जुबिन गर्ग को भावभीनी श्रद्धांजलि

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