लखीमपुर। लंबे इंतज़ार, विवाद और अटकलों के बाद आखिरकार गेरुकामुख बांध में टरबाइन घूमने लगी। एनएचपीसी (NHPC) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर भूपेंद्र कुमार गुप्ता की मौजूदगी में कल 24 अक्टूबर को 250 मेगावाट क्षमता वाली पहली टरबाइन का सफल परीक्षण किया गया।
सुबनसिरी नदी पर निर्मित इस विशाल जलविद्युत परियोजना का लक्ष्य 2000 मेगावाट बिजली उत्पादन है। अब तक तीन टरबाइन पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं, जबकि चौथी टरबाइन दिसंबर तक पूरी होने की उम्मीद है। परियोजना के पहले चरण में एनएचपीसी ने 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सूत्रों के अनुसार, नवंबर महीने में गेरुकामुख से औपचारिक रूप से बिजली उत्पादन शुरू होने की संभावना है। आज दोपहर करीब डेढ़ बजे एनएचपीसी सीएमडी और परियोजना निदेशक की उपस्थिति में पहली बार टरबाइन का संचालन किया गया।
गेरुकामुख परियोजना को कई वर्षों से विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ा था। सितंबर के अंतिम सप्ताह में नेशनल डैम सिक्योरिटी अथॉरिटी (NDSA) से सुरक्षा स्वीकृति मिलने के बाद एनएचपीसी को टरबाइन परीक्षण की अनुमति मिली।
एनएचपीसी सूत्रों के अनुसार, गेरुकामुख जलाशय को भरने के लिए लगभग 1365 मिलियन घन मीटर पानी की आवश्यकता होती है। वर्तमान में जलाशय 175 मीटर की ऊँचाई तक भर चुका है, जो टरबाइन संचालन के लिए आवश्यक स्तर से अधिक है।
गेरुकामुख बांध में टरबाइन के घूमने के साथ ही असम और समूचे उत्तर-पूर्व भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नया ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है।








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