रमेश मुन्दड़ा
होजाई। होजाई जिला साहित्य सभा के आकाश उप-समिति के प्रयास और होजाई साहित्य सभा के तत्वाधान में सभा के होजाई के नया बाजार स्थित साहित्यरथी बेजबरुआ भवन में बरपेटा की प्रसिद्ध लोककला थियोनाम की दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 22 और 23 नवंबर को आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिले के लंका, होजाई, बामुुनगांव, गोहागांव आदि क्षेत्रों से अर्धशताधिक महिलाओं ने थियोनाम के गायन पद्धति, ताल, लय और आध्यात्मिक दर्शन के बारे में प्रशिक्षण प्राप्त किया। बरपेटा के प्रख्यात ओजा दिनेश चंद्र दास के नेतृत्व में आयोजित प्रशिक्षण में समल व्यक्ति के रूप में गोविंद पाठक ने भी भाग लिया। प्रशिक्षण के अंत में 23 नवंबर को शाम को होजाई जिला साहित्य सभा के अध्यक्ष पद्मकांत बोरा की अध्यक्षता में समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर असम साहित्य सभा की नाट्य साहित्य उप-समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अनुप कुमार बरठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।अनुप कुमार बरठाकुर ने कहा कि इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं भूलती जा रही बृहत्तर असमिया लोक-संस्कृति के संरक्षण, प्रचार और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक जाति की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति और साहित्य से होती है, इसलिए असमिया जाति को अपने विशाल लोकगीत, लोकनृत्य, लोककला और लोकनाट्य के माध्यम से उज्ज्वल बनाया जाए तो वह दूसरों की दृष्टि में एक सुसंस्कृत जाति के रूप में पहचानी जा सकती है। उन्होंने होजाई जिला आकाश उप-समिति के प्रयासों की भी खूब प्रशंसा की।मुख्य प्रशिक्षक दिनेश चंद्र दास ने आकाश उप-समिति की ओर से प्राप्त सम्मान स्वीकार करते हुए कहा कि यद्यपि संख्या कम है, लेकिन होजाई क्षेत्र में काफी प्रतिभाशाली नामती हैं और कई बार प्रशिक्षण दिया जाए तो होजाई से एक बड़ा थियानाम दल तैयार किया जा सकता है।समापन समारोह में होजाई साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष दयाल चंद्र क्र, डॉ. शमसुल हक, सुलेखिका अनिमा बरुआ आदि ने आकाश उप-समिति के कार्यकारी अध्यक्ष कल्पना देवी गोस्वामी, आह्वायक आराधना शर्मा, बिंदिया कौर, प्रीतिरेखा दास, पद्मिनी डाओलागुफु, रीना देउरी आदि कर्मकर्ताओं की भी खूब सराहना की और सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र वितरित किए। समापन में आकाश उप-समिति के सभी सदस्यों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।।







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