पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने माना कि बार-बार विदेशी कर्ज लेने की वजह से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख कमजोर होती दिखाई दे रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जरूरतें इतनी बढ़ गई हैं कि सरकार को कई बार दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मांगनी पड़ी। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान को कई कठिन शर्तें भी स्वीकार करनी पड़ीं, जिससे सरकार के फैसलों पर असर पड़ा।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लगातार उधार पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए सम्मानजनक स्थिति नहीं होती। इससे न सिर्फ देश की आर्थिक स्वतंत्रता कम होती है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी छवि भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संकट, बढ़ता कर्ज, महंगाई और कमजोर मुद्रा ने आम लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती देश को आत्मनिर्भर बनाने और कर्ज पर निर्भरता कम करने की है।









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