लखीमपुर जिले के जोहींग त्रिवेणी संगम पर महा रुद्र यज्ञ का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज का आगमन व प्रवचन हुआ। वे गोवर्धन मठ के शंकराचार्य के रूप में जाने जाते हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ, पुरी से संबंधित एक प्रमुख हिंदू आध्यात्मिक नेता हैं। उन्होंने देश भर में सनातन धर्म, 'अखंड भारत' की कल्पना और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए व्यापक यात्राएं की हैं। वे अक्सर धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखते हैं।
ईस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधु–संतों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। यह आयोजन असम की समृद्ध धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उदाहरण बना।
कार्यक्रम में लखीमपुर के विधायक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ उनके साथ प्राइड ईस्ट ईन्टरटेन्मेन्ट के सी एम डी डॉक्टर रिंकी भुइयां शर्मा सहित कई प्रमुख सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक हस्तियां भी शामिल हुईं। अतिथियों ने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरण के साथ-साथ सामुदायिक एकता को भी सुदृढ़ करते हैं।
महा रुद्र यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और विशेष अनुष्ठानों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। आयोजन में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिसने क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जुड़ाव को और मजबूत किया।
यह आयोजन न केवल स्थानीय धार्मिक उत्सवों और अनुष्ठानों की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि जोहींग त्रिवेणी संगम अब क्षेत्र की धार्मिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। महा रुद्र यज्ञ की सफलता ने लखीमपुर को आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई है। इस महा रुद्र यज्ञ के पूर्णाहुति के दिन यहां बने भव्य शिव मंदिर में आज 21 दिसंबर को शिव परिवार के मूर्तियों को स्थापित कर उनकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।








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