विप्र फाउंडेशन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नीतियों की पुन समीक्षा करने का अनुरोध किया
गुवाहाटी. विप्र फाउण्डेशन असम की प्रदेशाध्यक्ष मंजुलता शर्मा तथा गुवाहाटी चैप्टर अध्यक्ष शिवकुमार पारीक तथा विप्र फाउण्डेशन टीम से अमित पारीक, राहुल शर्मा, आकाश शर्मा, राकेश भातरा,संपत मिश्र,विनीता रिणवाँ,अशोक शर्मा,अनिल शर्मा,रोहित खंडेलवाल,स्वाति सोतीजय सोती, अरविंद पारीक,दीपक शर्मा तथा अन्य सदस्यों ने संवैधानिक समता, प्राकृतिक न्याय को सुनिश्चित करने हेतु पुनर्विचार एवं संशोधन का विनम्र निवेदन करते हुए इस एक्ट का विरोध करते हुए आज पत्रकारो से कहा कि विप्र फाउंडेशन एक राष्ट्रव्यापी सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जो शिक्षा, सामाजिक समरसता, समान अवसर तथा राष्ट्र-निर्माण के कार्यों हेतु सतत समर्पित है।
समता एवं सामाजिक न्याय का उद्देश्य निस्संदेह प्रशंसनीय है; परंतु किसी भी नीति का स्वरूप ऐसा होना आवश्यक है, जो भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय तथा निष्पक्ष प्रक्रिया की कसौटी पर पूर्णत: खरा उतरता हो। इस एक्ट की कुछ धाराएँ एवं प्रस्तावित कार्य प्रणाली - समानता का अधिकार, भेदभाव-निषेध तथा जीवन एवं व्यक्तिगत गरिमा के अधिकार की भावना के अनुरूप संतुलित, सर्वसमावेशी एवं निष्पक्ष प्रतीत नहीं होती।
इसका “शिकायत-आधारित ढाँचा” चुगली-संस्कृति को बढ़ावा दे सकता है, जो शैक्षणिक परिसरों में भय, दबाव, ध्रुवीकरण और वर्ग-आधारित टकराव की परिस्थिति निर्मित कर सकता है।माननीय प्रधानमंत्री जी, हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मूलमंत्र तथा संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप उच्च शिक्षा नीति/विनियम को न्यायपूर्ण, संतुलित, तथ्याधारित एवं समरसतापूर्ण बनाए रखने हेतु आवश्यक कदम उठाएगी।







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