रमेश मुन्दड़ा
होजाई: असम विधानसभा चुनाव 2026 की रिंग में भाजपा ने होजाई सीट पर बम फोड़ा! पूर्व विधायक शिलादित्य देव को टिकट थमाकर पार्टी ने राजनीतिक शतरंज का मास्टरस्ट्रोक चला दिया। हिंदू नववर्ष के चमकते मुहूर्त पर गुरुवार को आई इस घोषणा ने समर्थकों के दिलों में आग लगा दी—बाजार गूंजे नारों से, गलियां मिठाई की बरसात से सराबोर, और बधाइयों का सैलाब उमड़ पड़ा!वर्तमान विधायक रामकृष्ण घोष ने सड़कों के जाल बुनने, स्कूलों को चमकाने और बाढ़ की मार से जूझने वाले प्रयासों से टिकट की जंग में लोहा लिया था। लेकिन शिलादित्य देव का 2016-21 का विधायकी दौर और उसके बाद असम भाषाई अल्पसंख्यक उन्नयन परिषद के चेयरमैन के रूप में कमाल—अल्पसंख्यक छात्रावासों का विस्तार, हेल्थ सेंटर्स की नई जान, सांस्कृतिक उत्सवों का धमाल—ने जनसमर्थन का किला ढहा दिया। अन्य दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए यह चॉइस विकास की रॉकेट-स्पीड और समावेशी राजनीति का 'ग्रैंड स्लैम' साबित हो रही है।स्थानीयों का जोश फूट पड़ा: "शिलादित्य देव का जादू होजाई को आसमान छूएगा! सड़कें चमकेंगी, शिक्षा उड़ेगी ऊंचाई पर, स्वास्थ्य बनेगा कवच। भाजपा ने बाजी मार ली!" लोग चिल्ला रहे थे, "उनकी वापसी से होजाई का सूरज चमकेगा!" मगर रामकृष्ण घोष के चेहरों पर छाई उदासी की परतें साफ झलक रही हैं, भले मुंह बंद रखें। राजनीतिक पंडितों की नजर में यह दांव भाजपा की अल्पसंख्यक-मित्र इमेज को हीरे जैसा चमकाएगा, लेकिन गुटबाजी का कांटा पैरों तले खटक सकता है। शिलादित्य देव ने ठहाका लगाते कहा, "सभी वर्गों का हाथ थामकर होजाई को उड़ान देंगे—जीत हमारी मुट्ठी में!" अब होजाई की चुनावी अखाड़े में ढोल बज चुका है। रण कौन जीतेगा?








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