मुजफ्फरपुर, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, मुजफ्फरपुर द्वारा आयोजित “भक्ति मार्ग क्यों?” विषयक राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. उमेश कुमार श्रीवास्तव ने भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे जीवन की समस्याओं के समाधान का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग बताया। कार्यक्रम में अन्य संत एवं उपस्थित श्रोता भी शामिल रहे।
प्रो. उमेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य के जीवन की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण ईश्वर से दूरी है। जब व्यक्ति ईश्वर के सान्निध्य में आता है, तो उसके जीवन में शांति, संतुलन और समाधान स्वतः आने लगते हैं।
उन्होंने भक्ति के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए बताया कि कुछ भक्त ‘नित्य सिद्ध’ होते हैं, जो जन्म से ही ईश्वर में लीन रहते हैं—जैसे रामकृष्ण परमहंस और मीरा बाई। वहीं सामान्य साधकों को अभ्यास (अभ्यास) और वैराग्य के माध्यम से धीरे-धीरे भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ना होता है।
अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने ‘बंदर और बिल्ली’ के प्रसिद्ध उदाहरण के माध्यम से भक्ति की अवस्थाओं को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में साधक को स्वयं प्रयास करना पड़ता है, लेकिन अंततः उसे पूर्ण समर्पण की अवस्था तक पहुँचना होता है, जहाँ वह पूरी तरह ईश्वर पर निर्भर हो जाता है।
प्रो. श्रीवास्तव ने यह भी स्पष्ट किया कि भक्ति का अर्थ सांसारिक कर्तव्यों का त्याग नहीं है, बल्कि उन्हें ईश्वरार्पण भाव से करना है। इससे ‘मैं ही कर्ता हूँ’ का अहंकार समाप्त होता है और व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना शांति और धैर्य के साथ कर पाता है।
उन्होंने अपने वक्तव्य में नवधा भक्ति का भी उल्लेख किया और बताया कि भगवान राम द्वारा शबरी को बताए गए भक्ति के नौ रूप साधकों के लिए एक सरल और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रोताओं ने विषय की गहराई और प्रस्तुति की सरलता की सराहना की। संगोष्ठी का निष्कर्ष यही रहा कि भक्ति मार्ग व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है, बल्कि जीवन की हर समस्या का समाधान भी प्रदान करता है।








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