जुबीन गर्ग को लेकर सियासी बयानबाजी : जुबिन गर्ग के चाचा मनोज बोरठाकुर की प्रतिक्रिया : चुनाव में जुबिन को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर नाराजगी
प्रियंका गांधी के बयान पर नाराजगी जताई
प्रीति पारीक, शिवसागर :
असम के प्रसिद्ध गायक और सांस्कृतिक आइकन स्वर्गीय जुबिन गर्ग को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर उनके चाचा मनोज बोरठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि जुबिन गर्ग के नाम का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए न किया जाए। आज शिवसागर में मनोज बोरठाकुर ने कहा कि जुबिन गर्ग असम के आम लोगों के चहेते और सच्चे प्रतिनिधि थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जुबिन गर्ग असम का बेटा है, कोई भी उसे अपनी राजनीति का मुद्दा बनाने की कोशिश न करे। उन्होंने असम विधानसभा चुनाव के दौरान हो रही राजनीतिक नेताओं की बयानबाजी से गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि किसी भी राजनैतिक पार्टी को 100 दिन में न्याय या 150 दिन में न्याय देने जैसे वादे नहीं करने चाहिए। सभी दलों से अनुरोध है कि वे न्याय की प्रक्रिया को स्वाभाविक और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने दें। जुबिन को केंद्र में रखकर राजनीति न करने की अपील करते हुए वरिष्ठ पत्रकार तथा जुबीन गर्ग के चाचा मनोज बोरठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति जुबिन गर्ग को केंद्र बनाकर बयानबाजी न करे। इससे परिवार को दुख पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि जुबीन गर्ग को न्याय किसी राजनैतिक पार्टी से नहीं मिलेगा। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रियंका गांधी भी न्याय नहीं दे सकतीं, न ही कोई अन्य राजनीतिक दल। न्याय केवल सही प्रक्रिया और ईमानदारी से ही मिल सकता है। बोरठाकुर ने अपनी बात को और मजबूत करते हुए कहा कि जुबिन गर्ग को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश से हम बहुत क्षुब्ध हैं। जुबिन को उनकी अपनी पहचान और अस्मिता में रहने दें। कोई भी उन्हें राजनीति के बीच घसीटने की कोशिश न करे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जुबिन गर्ग की मौत और न्याय की मांग को कुछ राजनीतिक दल और नेता मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आज शिवसागर जिले के नाजिरा में चुनाव प्रचार के लिए आई कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी जुबीन गर्ग के न्याय को लेकर टिप्पणी की थी। परिवार का मानना है कि जुबिन गर्ग का नाम चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। मनोज बोरठाकुर का संदेश साफ है। जुबिन गर्ग असम के लोगों के लिए थे। उनका सम्मान करें, न्याय की मांग करें, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए उनका इस्तेमाल न करें।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें