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लखीमपुर में चुनावी रण चरम पर, ‘सेनापति’ बनने की जंग रोचक — भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर के आसार



लखीमपुर से राजेश राठी की रिपोर्ट


आगामी 9 अप्रैल को होने वाले 76 नंबर लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। चुनावी बिगुल बजते ही पूरा क्षेत्र मानो लोकतंत्र के उत्सव में डूब गया है। गांवों की चौपालों से लेकर कस्बों की गलियों तक, चाय की दुकानों से लेकर बाजारों की हलचल तक हर जगह चुनावी चर्चाओं ने माहौल को गर्म कर दिया है। जैसे-जैसे मतदान की तिथि नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों की धड़कनें तेज होती नजर आ रही हैं और वे अपने समर्थकों के साथ पूरी ताकत झोंकते हुए जनसमर्थन जुटाने में दिन-रात जुटे हुए हैं। 76 नंबर लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला बहुकोणीय होते हुए भी बेहद दिलचस्प हो गया है। भारतीय जनता पार्टी से मौजूदा विधायक मानव डेका, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से पूर्व विधायक घनो बुरागुहाई, SUCI (C) से बिरिंची पेगू, RUC से नूरुल अली तथा निर्दलीय उम्मीदवार हेमंता बरुआ चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। सभी उम्मीदवार अपने-अपने समर्थकों और दलीय कार्यकर्ताओं के साथ गांव-गांव संपर्क अभियान चला रहे हैं। जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं, पदयात्राएं, जनसंपर्क अभियान और छोटी-बड़ी बैठकों का दौर लगातार जारी है। प्रत्याशी मतदाताओं तक सीधे पहुंचकर अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं। चुनावी रणभेरी बजने के बाद से क्षेत्र में प्रचार अभियान की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। सुबह से लेकर देर रात तक उम्मीदवारों की गतिविधियां जारी रहती हैं। कहीं रोड शो आयोजित हो रहे हैं, तो कहीं जनसभाओं में भीड़ जुटाने की कवायद चल रही है। समर्थक अपने-अपने प्रत्याशी के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं। चुनावी बैनर, पोस्टर और झंडों से पूरा क्षेत्र सजा हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे स्पष्ट है कि इस बार का चुनाव पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंग चुका है। राजनीतिक जानकारों और क्षेत्र के जागरूक मतदाताओं का मानना है कि इस बार मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कांटे का हो सकता है। एक ओर भाजपा के युवा चेहरा और वर्तमान विधायक मानव डेका अपनी उपलब्धियों और संगठन की मजबूती के साथ मैदान में हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व विधायक घनो बुरागुहाई अपने अनुभव और जनसंपर्क के आधार पर मजबूत चुनौती पेश करते दिखाई दे रहे हैं। दोनों ही राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं, जिससे मुकाबला दिन-प्रतिदिन रोचक होता जा रहा है। वहीं अन्य उम्मीदवार भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में माने जा रहे हैं। SUCI (C) के बिरिंची पेगू, RUC के नूरुल अली तथा निर्दलीय उम्मीदवार हेमंता बरुआ भी अपने-अपने समर्थकों के साथ सक्रिय नजर आ रहे हैं। इन उम्मीदवारों की सक्रियता से चुनावी मुकाबले में नया मोड़ आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत प्रभाव के कारण इन प्रत्याशियों की भूमिका अहम मानी जा रही है। चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक और स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा तेज हो गई है। विकास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाढ़ और स्थानीय सुविधाओं को लेकर मतदाता प्रत्याशियों से सवाल कर रहे हैं। वहीं जातीय और सामुदायिक समीकरणों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा सुनने को मिल रही है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने अब तक खुलकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। यही मौन मतदाता इस बार चुनाव परिणाम की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि चुनाव के अंतिम चरण में समीकरण बदलने की संभावना बनी हुई है। प्रचार के अंतिम दिनों में उम्मीदवारों की रणनीति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और समर्थकों की एकजुटता चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है। कई क्षेत्रों में यह चर्चा भी है कि अंतिम समय में अंदरूनी समीकरण बदलने की स्थिति भी बन सकती है, जिससे चुनावी मुकाबले में अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं। अब पूरे क्षेत्र की नजर 9 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है, जब मतदाता अपने बहुमूल्य मतों के माध्यम से 76 नंबर लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र का नया सेनापति चुनेंगे। वहीं 4 मई को होने वाली मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस चुनावी महासंग्राम में जीत का सेहरा किस उम्मीदवार के सिर बंधता है। फिलहाल चुनावी मुकाबला बेहद रोमांचक और अनिश्चित नजर आ रहा है, जिससे यह कहना मुश्किल हो गया है कि आखिर इस बार 76 नंबर लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र का सेनापति कौन बनेगा।

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