गुवाहाटी, किंवदंती कंठशिल्पी आशा भोंसले के निधन पर देश-विदेश के साथ ही असम प्रदेश में भी गहरा शोक छाया हुआ है। एक शोक संदेश में बहुभाषिक साहित्य मंच, असम के प्रधान संपादक दीपक शर्मा ने कहा - "भोंसले के कोकिल कंठ में युगमिया हो रहे कई गीत। युग-युग में रहेंगे भारत के सीने में भोंसले। भोंसले के मृत्यु के साथ ही गान का एक युग समाप्त हो गया।"
असम साहित्य सभा के पूर्व कोषाध्यक्ष किशोर कुमार जैन ने एक शोक संदेश में कहा - "भोंसले अपने सुमधुर कंठ से जगत को जीतने में सफल हुए थे। अन्य भाषाओं के साथ ही आशा भोंसले ने असमी भाषा में गाए गीत चिरयुगमिया हो रहे।"
आदर के शिल्पी आशा भोंसले के निधन पर विष्णुप्रिया मणिपुरी साहित्य परिषद के सभापति डॉ० लक्ष्मींद्र सिंह, नारी कल्याण मंच, असम के सचिव डॉ० असमी गगई, महापुरुष श्री श्री हरिदेव के जीवन-दर्शन अध्ययन समिति, असम के सभापति डॉ० बीरेंद्र कुमार भट्टाचार्य, असम शिशु साहित्य समाज के सभापति प्रदीप नारायण भट्ट, कामरूप महानगर जिला साहित्य सभा के सांस्कृतिक उप-समिति के कार्यकारी सभापति नीरेन चंद्र वैश्य और आह्वायक पदुमी पाठक, परागज्योति प्रकाशन, विशिष्ट चिंतक बासुदेव माली, कवि पुतुली ठाकुरिया मेधि आदि दल-संघटनों ने गहरा शोक प्रकट किया है।








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