25 प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद, 4 मई को खुलेगा भाग्य का ताला
74 नंबर रंगानदी में रचा जाएगा इतिहास, मिलेगा पहला विधायक
लखीमपुर से राजेश राठी और ओम प्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट
जैसे-जैसे मतगणना की घड़ी नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे असम सहित पूरे राजनीतिक परिदृश्य में उत्सुकता, बेचैनी और रोमांच अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। चुनावी महासंग्राम समाप्त हो चुका है, जनादेश मतपेटियों अर्थात EVM मशीनों में बंद हो चुका है, लेकिन असली जंग अब 4 मई को लड़ी जाएगी, जब मतगणना केंद्रों से निकलने वाला हर राउंड प्रत्याशियों की सांसें तेज करेगा और समर्थकों की धड़कनों को बढ़ा देगा।
असम के लखीमपुर जिले की पांच विधानसभा सीटों पर चुनावी रणभेरी बज चुकी है और अब 25 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला जनता के हाथों से निकलकर मशीनों में कैद है। हर प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के बीच जीत के दावे कर रहा है, कोई अपनी बढ़त बता रहा है तो कोई चुपचाप अंदरखाने समीकरण बैठाने में जुटा है। गांव की चौपालों से लेकर शहर की गलियों तक, चाय की दुकानों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक, हर जगह केवल एक ही चर्चा सुनाई दे रही है— कौन बनेगा विधायक? किसके सिर सजेगा विजयश्री का मुकुट?
बिहपुरिया में चार दावेदारों की प्रतिष्ठा दांव पर
73 नंबर बिहपुरिया विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,66,726 मतदाताओं में से 1,39,463 मतदाताओं ने मतदान कर चार प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला EVM में बंद कर दिया है। यहां मुकाबला सीधा नहीं बल्कि बेहद रोचक माना जा रहा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अंतिम राउंड तक तस्वीर साफ नहीं होगी। प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों से संपर्क बनाए हुए हैं और हर कोई अंदरूनी जीत का दावा कर रहा है।
रंगानदी में बनेगा इतिहास, मिलेगा पहला विधायक
74 नंबर रंगानदी विधानसभा क्षेत्र इस बार जिले ही नहीं, बल्कि पूरे असम की सबसे चर्चित सीटों में शुमार हो गया है। कारण साफ है—इस क्षेत्र से जो भी उम्मीदवार विजयी होगा, वह रंगानदी विधानसभा क्षेत्र का पहला विधायक कहलाएगा। यही वजह है कि यहां का चुनाव परिणाम सामान्य नहीं, ऐतिहासिक माना जा रहा है।
इस सीट पर कुल 1,78,033 मतदाताओं में से 1,59,750 मतदाताओं ने मतदान कर नौ उम्मीदवारों की किस्मत EVM में बंद कर दी है। नौ दावेदारों के मैदान में होने से मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय बन गया है। यहां हर वोट की कीमत सोने के समान मानी जा रही है। समर्थकों में भारी उत्साह है और सभी को इंतजार है कि इतिहास किसके नाम लिखा जाएगा।
नाऊबोसीया में आरक्षित सीट पर कांटे की टक्कर
75 नंबर नाऊबोसीया (SC) विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,73,182 मतदाताओं में से 1,53,147 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यहां चार प्रत्याशी मैदान में हैं और मुकाबला बेहद कांटे का बताया जा रहा है। स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण और विकास के वादे यहां चुनावी हवा का केंद्र बने रहे। अब देखना होगा कि जनता ने किसे अपना आशीर्वाद दिया है।
लखीमपुर सीट पर पांच सूरमाओं की प्रतिष्ठा की लड़ाई
76 नंबर लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार पांच प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे। कुल 1,64,453 मतदाताओं में से 1,41,135 मतदाताओं ने मतदान कर दिया है। यह सीट जिले की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में गिनी जा रही है, क्योंकि यहां की जीत को राजनीतिक प्रभाव और जनसमर्थन का बड़ा संकेत माना जाता है। प्रत्याशी मतगणना से पहले मंदिरों, कार्यकर्ताओं और रणनीतिक बैठकों में व्यस्त नजर आ रहे हैं।
धकुवाखाना में त्रिकोणीय जंग
77 नंबर धकुवाखाना (ST) विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,63,082 मतदाताओं में से 1,35,410 मतदाताओं ने मतदान किया है। यहां तीन उम्मीदवार मैदान में हैं और मुकाबला त्रिकोणीय होने के कारण परिणाम को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। यहां का हर राउंड किसी भी समय समीकरण बदल सकता है।
जिले में रिकॉर्ड मतदान, जनता ने दिखाया उत्साह
यदि पूरे लखीमपुर जिले की बात करें तो कुल 8,45,476 मतदाताओं में से 7,28,905 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो लगभग 86.21 प्रतिशत मतदान है। यह आंकड़ा बताता है कि जनता ने लोकतंत्र के पर्व में पूरे जोश और उत्साह के साथ भाग लिया। भारी मतदान ने प्रत्याशियों की धड़कनें और बढ़ा दी हैं, क्योंकि अधिक मतदान को हमेशा परिवर्तन, नाराजगी या मजबूत समर्थन से जोड़कर देखा जाता है।
जीत के सपने, हार का डर, जमानत जब्ती की भी चर्चा
अब हर उम्मीदवार खुद को विजेता मान रहा है। कोई 10 हजार से जीतने का दावा कर रहा है, कोई चुपचाप अंदरूनी रिपोर्ट पर भरोसा जता रहा है। समर्थक पटाखे तैयार रखे बैठे हैं, तो विरोधी खेमे में चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि कुल 25 उम्मीदवारों में से कितनों की जमानत जब्त होगी और कितने उम्मीदवार केवल नामांकन तक ही सीमित रह जाएंगे। कई सीटों पर मुकाबला सीधा है तो कई जगह वोटों का बंटवारा परिणाम को चौंकाने वाला बना सकता है।
4 मई को खुलेगा किस्मत का पिटारा
अब सारी नजरें 4 मई पर टिकी हैं। उसी दिन तय होगा कि पांच सीटों पर कौन बनेगा जनता का असली प्रतिनिधि, किसके सिर सजेगा जीत का ताज, किसके समर्थक सड़कों पर जश्न मनाएंगे और किसे हार का कड़वा घूंट पीना पड़ेगा।
फिलहाल लखीमपुर जिले में सियासी तापमान उफान पर है, प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हैं, समर्थकों की नींद उड़ी हुई है और जनता इंतजार में है —आखिर सत्ता की शतरंज में बाजी कौन मारेगा?








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