लखीमपुर में उस समय हड़कंप मच गया जब क्षेत्रीय वन अधिकारी शिवाशीष शांडिल्य को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की टीम ने यह कार्रवाई पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दी। जानकारी के मुताबिक, आरोपी अधिकारी अपने सरकारी आवास में ही रिश्वत ले रहा था, तभी टीम ने मौके पर छापा मारकर उसे पकड़ लिया।
सूत्रों के अनुसार उत्तर लखीमपुर के एक व्यापारी एवं ठेकेदार अमृत गोगोई से 12,000 रूपए की रिश्वत लेते समय यह गिरफ्तारी हुई। जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां अब और गहराई में उतर चुकी हैं। आरोपी के गुवाहाटी स्थित आवास पर भी छापेमारी जारी है कई अहम दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। इस मामले में सिर्फ एक अधिकारी ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
जिला वन मंडल अधिकारी मृगांक बरुआ का नाम भी संदेह के घेरे में है। जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी तेजी से काम कर रही हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जिस विभाग को पर्यावरण और कानून की रक्षा करनी चाहिए, वहीं अगर भ्रष्टाचार फैलेगा तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
लखीमपुर की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है। क्या भ्रष्टाचार अब सिस्टम का हिस्सा बन चुका है? या फिर ऐसी कार्रवाइयां इसे जड़ से खत्म करने की शुरुआत हैं?








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