गुवाहाटी, आठगांव स्थित श्री गौहाटी गौशाला के वृंदावन गार्डन प्रांगण में सेठ सांवरिया सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय नानी बाई रो मायरो संग भक्तमाल कथा के द्वितीय दिवस भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान भक्ति रस से सराबोर वातावरण में श्रद्धालुओं ने कथा एवं भजनों का आनंद लिया।
व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए मुख्य कथावाचक गौरव व्यास ने वर्तमान समय में कथा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज मनुष्य के पास सभी भौतिक सुख-सुविधाएं होने के बावजूद मानसिक शांति का अभाव है। उन्होंने नानी बाई रो मायरो प्रसंग के माध्यम से भक्त शिरोमणि नरसिंह मेहता के प्रारंभिक जीवन एवं उनकी भक्ति भावना का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
महाराज ने कहा कि भक्ति दो प्रकार की होती है— एक कामना युक्त भक्ति और दूसरी निष्काम भक्ति। इनमें निष्काम भक्ति को सर्वोत्तम बताते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त भगवान से किसी प्रकार की इच्छा नहीं रखता, बल्कि पूर्ण समर्पण भाव से उनकी आराधना करता है। ठाकुरजी भक्तों के भाव देखते हैं और समय आने पर उनकी हर आवश्यकता स्वयं पूरी करते हैं।
कथा के दौरान महाराज ने यह भी बताया कि किस प्रकार सांवरिया सेठ ने नरसी जी की हुंडी स्वीकार की थी। साथ ही राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध भक्त लाखा जी के प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया।
भजनों की मधुर प्रस्तुतियों से पूरा पंडाल भक्तिमय बना रहा। वहीं राधा-कृष्ण एवं गोपियों की जीवंत झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का विशेष केंद्र रही, जिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे।
आयोजन समिति के सुरेंद्र लाठ ने बताया कि कथा के द्वितीय दिवस की सेवा रेनु-संतोष चौधरी, रितु -अजय अग्रवाल, प्रियंका-विशाल लाठ तथा सरिता-महेंद्र अग्रवाल परिवार द्वारा कराई गई। कथा का आयोजन प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 6 बजे तक किया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी सदस्यों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है।









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