गुवाहाटी, जैन समाज के 16वें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ भगवान का “जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव” शुक्रवार को आठगांव स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रातः 5 बजे से सायं 7 बजे तक चले इस धार्मिक महोत्सव में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
महोत्सव के शुभारंभ पर भगवान शांतिनाथ का विजय कुमार चुडीवाल ने एक हजार आठ कलशों से भव्य कलशाभिषेक का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सुरेंद्र छाबड़ा और कमल गंगवाल हाथी गोला परिवार ने शान्तिधारा की व पूजा-पाठ एवं संगीतमय विधान का आयोजन हुआ, जिससे पूरा चैत्यालय भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में भगवान श्रीजी की आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई जिसमें 800 श्रद्धालुओं ने भाग लिया भगवान शांतिनाथ की रथ यात्रा में श्री जी को विराजमान करने का सौभाग्य धर्मचंद काला और सुमित गोधा को प्राप्त हुआ। इन्होंने सिंहासन व यंत्र विराजमान किया। भगवान के चारों दिशाओं में चार चंवर के लिए सौरभ ठोलिया, विजय सबलावत,डॉक्टर कमल छाबड़ा ओर कमल रावका को सौभाग्य प्राप्त हुआ। मनीष काला पांडू व मनोज विनायक्या के सानिध्य में शांति विधान में 400 लोगो ने भाग लिया। इस अवसर पर आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मनोज विनायक्या ने जानकारी देते हुए बताया कि तप कल्याणक के अवसर पर डेढ़ सौ पुरुष एवं डेढ़ सौ महिलाओं ने उपवास एवं तप आराधना कर आध्यात्मिक साधना की।वहीं मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में विशेष विधान, पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। दिनभर चैत्यालय में धर्म एवं अध्यात्म की अनूठी छटा देखने को मिली।
कार्यक्रम के दौरान जयप्रकाश पांड्या और शैलेश गंगवाल के सानिध्य में धर्म चर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसमें जैन धर्म के सिद्धांतों, संयम, तप एवं अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर डॉ. कमल जैन एवं डॉ. शेफाली जैन ने स्वास्थ्य चर्चा एवं जीवन शैली विषय पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ जीवन, संतुलित आहार और मानसिक शांति के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक जीवन शैली व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाती है।
सायंकाल में प्रतिक्रमण, भक्तिमय भजन एवं 48 दीपक से भक्तामर दीप आराधना का भव्य आयोजन किया गया। दीपों की मनोहारी सज्जा और भक्तिमय संगीत ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरे दिन चले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली।
समारोह के सफल आयोजन में समाज के पदाधिकारियों, महिलाओं, युवाओं एवं श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा। आयोजकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, संस्कार और एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।








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