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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कृत्रिम बाढ़ और खुले मैनहोलों पर जताई गंभीर चिंता



गुवाहाटी, आज माननीय डिवीजन बेंच, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने गुवाहाटी शहर में लगातार उत्पन्न हो रही कृत्रिम बाढ़ की स्थिति तथा खुले मैनहोलों की खतरनाक अवस्था पर गंभीर संज्ञान लिया।


यह मामला PIL No. 36/2026 के तहत अधिवक्ता संदीप चमडीया द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें शहर में बार-बार होने वाली कृत्रिम बाढ़, असुरक्षित जल निकासी व्यवस्था तथा जनसुरक्षा में गंभीर विफलताओं का मुद्दा उठाया गया है।


सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि गुवाहाटी शहर के सभी खुले मैनहोलों एवं खतरनाक नालों को तत्काल बंद एवं सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि न हो।


न्यायालय ने राज्य सरकार से अब तक उठाए गए कदमों, प्रस्तावित उपायों तथा मैनहोल बंद करने और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने को भी कहा।


साथ ही न्यायालय ने संबंधित आयुक्त को सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।


माननीय डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि मानव जीवन एवं जनसुरक्षा की रक्षा करना राज्य सरकार तथा नागरिक प्रशासन का संवैधानिक दायित्व है।


अधिवक्ता संदीप चमडीया द्वारा दायर जनहित याचिका में उल्लेख किया गया है कि गुवाहाटी में लगातार हो रही कृत्रिम बाढ़ का मुख्य कारण जल निकासी व्यवस्था की विफलता, अवैज्ञानिक शहरी योजना, आर्द्रभूमियों पर अतिक्रमण तथा प्रशासनिक लापरवाही है।


याचिका में 19 अप्रैल 2026 को मालीगांव में हुई उस दुखद घटना का भी जिक्र किया गया, जिसमें बाढ़ के पानी में छिपे खुले नाले में गिरने से एक महिला की मौत हो गई थी।

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