गुवाहाटी, अधिवक्ता संदीप चमड़ीया द्वारा गौहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष असम राज्य में लगातार बढ़ रही शहरी जलभराव, खुले मैनहोल, असुरक्षित नालियों एवं जर्जर ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर दो महत्वपूर्ण जनहित याचिकाएँ दायर की गई हैं।
पीआईएल संख्या 42/2026 में अधिवक्ता संदीप चमड़ीया ने गुवाहाटी, सिलचर, डिब्रूगढ़, नगांव, जोरहाट, तेजपुर, तिनसुकिया, करीमगंज सहित राज्य के विभिन्न नगर क्षेत्रों में लगातार उत्पन्न हो रही कृत्रिम बाढ़ एवं असुरक्षित ड्रेनेज व्यवस्था का मुद्दा उठाया है। याचिका में राज्यभर में वैज्ञानिक एवं समन्वित “अर्बन फ्लड मैनेजमेंट पॉलिसी” तैयार कर उसे प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि खुले मैनहोल, बिना ढके नालों तथा क्षतिग्रस्त ड्रेनेज व्यवस्था के कारण कई लोगों की मृत्यु, विद्युत स्पर्शाघात, दुर्घटनाएँ एवं गंभीर चोटें हुई हैं। मामले की सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
वहीं, अधिवक्ता संदीप चमड़ीया द्वारा दायर दूसरी जनहित याचिका PIL संख्या 34/2026, जो विशेष रूप से गुवाहाटी शहर के खुले मैनहोल एवं नालियों से संबंधित है, की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि 12 मई 2026 को न्यायालय ने सरकार को गुवाहाटी शहर के सभी खुले मैनहोल एवं नालियों को तत्काल ढकने तथा इस संबंध में विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। किन्तु ताजा सुनवाई में सरकार शपथपत्र दाखिल करने में विफल रही और अतिरिक्त समय की मांग की।
इस पर न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि खुले मैनहोल एवं असुरक्षित नालियों के कारण किसी भी निर्दोष नागरिक की जान नहीं जानी चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इतने गंभीर विषय को केवल विलंब एवं निष्क्रियता के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता।
माननीय न्यायालय ने राज्य सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने तथा गुवाहाटी शहर के सभी मैनहोल एवं नालियों को सुरक्षित बनाने हेतु किए गए कार्यों का विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
दोनों जनहित याचिकाएँ नागरिक सुरक्षा, शहरी प्रशासन एवं भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्नों को केंद्र में लाती हैं।









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