सेठ सांवरिया सत्संग समिति का नानी बाई रो मायरो संग भक्तमाल कथा
गुवाहाटी, सेठ सांवरिया सत्संग समिति के तत्वावधान में आठगांव स्थित श्री गौहाटी गौशाला के वृंदावन गार्डन प्रांगण में चल रहे आठ दिवसीय नानी बाई रो मायरो संग भक्तमाल कथा के तृतीय दिवस व्यासपीठ पर विराजमान मुख्य कथा वाचक गौरव व्यास ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भक्त शिरोमणि नरसी मेहता की सुपुत्री नानी बाई के विवाह उपरांत जब मायरे का समय आया, तब ससुराल पक्ष की ओर से मायरे की लंबी सूची अर्थात मायरे का कागज भेजा गया।
महाराज ने कहा कि उस सूची में अनेक प्रकार के वस्त्र, आभूषण, मिठाइयां, बर्तन एवं कीमती उपहारों की मांग लिखी गई थी। साधनहीन होने के बावजूद नरसी मेहता जी के मुख पर चिंता नहीं, बल्कि प्रभु के प्रति अटूट विश्वास था। उन्होंने वह कागज हाथ में लेकर अपने आराध्य श्रीकृष्ण और राधा का स्मरण किया और विनम्र भाव से प्रार्थना की कि अब उनकी लाज केवल प्रभु ही रख सकते हैं। कथा में वर्णन आता है कि नरसी मेहता जी जब श्री राधाकृष्ण प्रभु को मायरे का कागज अर्पित करते हैं, तब उनकी आंखों में भक्ति, समर्पण और विश्वास का अद्भुत संगम दिखाई देता है। वे प्रभु से कहते हैं कि यह मायरा उनका नहीं, बल्कि स्वयं ठाकुरजी का है। भक्त की इस निष्कलंक श्रद्धा से प्रसन्न होकर श्री राधाकृष्ण उनकी सहायता का संकल्प लेते हैं। यही प्रसंग दर्शाता है कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से भगवान का स्मरण करता है, उसकी लाज और सम्मान की रक्षा स्वयं प्रभु करते हैं।
कथा के बीच-बीच में भक्तों से खचाखच भरे पंडाल में श्रद्धालुओं भजनों का भी जमकर आनंद उठाया। इस दौरान राधा-कृष्ण की गोपियों संग जीवंत झांकी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रही। आयोजन समिति सुरेंद्र लाठ ने बताया कि कथा के तृतीय दिवस समिति के सदस्य रेनु-संतोष चौधरी, अनुराधा-बलराम चौधरी, मनिषा-पंकज सांगानेरिया द्वारा कराई गई। पुरुषोत्तममास के अवसर पर सेठ सांवरियां सत्संग समिति द्वारा आयोजित नानी बाई रो मायरो संग भक्तमाल कथा का आयोजन रोजाना अपराह्न 2.30 बजे से शाम 6 बजे तक गौशला के वृंदावन गार्डन में किया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी सदस्यों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें